हर्निया का होमियोपैथी में स्थायी इल

रांची,29मई। रांची के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ यूएस वर्मा ने कहा है कि बदलते सामाजिक परिवेश में आज बड़ी संख्या में लोग विभिन्न बीमारियों से पीड़ित है, इनमें हर्निया पीड़ितों की संख्या में भी तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है। उम्र ढलने के साथ ही इस रोग की चपेट में आने की आशंका बढ़ती जाती है। एलौपैथी में हर्निया का ऑपरेशन से इलाज किया जा रहा है,लेकिन ऑपरेशन के बावजूद फिर से इस समस्या के उत्पन्न हो जाने की आशंका बनी रहती है,लेकिन होमियोपैथी में इसका
बिरसा कृषि विश्वविद्य्नालय अस्पताल के प्रभारी चिकित्सक डॉ0 यूएस वर्मा ने बताया िक हर्निया का मुख्य वजह बार-बार कब्ज और पाचन क्रिया का कमजोर पड़ जाता तथा वायु विकार (गैस, पेट में चोट आदि) है। उन्होंने बताया कि अनुवांशिकी दोष के कारा भी हार्निया होता है, जबकि मुख्य रुप से तीन प्रकार हर्निया होते है, जिसमें सुपरफिशियल हर्नियाप्रमुख है। इसमें इंगुयलर रिंग के फैलाव के कारण आंत का भाग सरक कर अंडकोष तक फैल जाता है। वहीं इंसीजनल हर्निया में ऑपरेशन का सिलाई टूट जाने के उपरांज पेट के अंदर का भाग बाहर फेंक देता है। जबकि आर्मनाइकल हर्निया में बच्चे के जन्म के बाद नाभी काटने में बरती गयी असावधानी प्रमुख होती है। इसके अलावा गले भी हर्निया देखा जाता है, इस प्रकार के हर्निया का काफी कम मामला प्रकाश में आता है।
डॉ.वर्मा ने बताया कि होमियापैथी इलाज में मुख्य रुप से खान-पान में परहेज, सादा-सुपाच्य भोजन, पेट में गैस न होना और पेट के अंदर के संक्रमण को दूर करने पर जोर दिया जाता है। इसके लिए कई तरह के बेल्ट भी अब आने लगे है। उन्होंने कहा कि हनिर्या के ऐलोपैथी इलाज में गैस व पेट के संक्रमण को दूर करने के लिए दवाई दी जाती है,इससे ठीक नहीं होने पर ऑपरेशन भी कर दिया जाता है, लेकिन इन सब प्रयास से हर्निया का समूल इलाज नहीं हो पाता है। होमियापैथी में इन्हीं सब कठिनाईयों को ध्यान में रखकर समुचित इलाज का प्रयास किया जाता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि हर्निया का बिना ऑपरेशन के इलाज सर्वाधिक लाभ है और इस पद्धति से यदि एक बार हर्निया ठीक हो जाता है, तो फिर दुबारा लोग इससे पीड़ित नहीं होते है। उन्होंने बताया कि होमियोपैथी पद्धति में रोग का मिलान किया जाता है और फिर उसी के अनुरुप दवा दी जाती है। डॉ. वर्मा ने बताया कि 10वर्ष से कम उम्र वालों में यह केस काफी कम पाया जाता है, वहीं 45वर्षाें से अधिक उम्र वालों को यह रोग होने की अधिक आशंका रहती है।

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One thought on “हर्निया का होमियोपैथी में स्थायी इल

  • June 10, 2011 at 1:05 pm
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