नशापन मुक्ति आंदोलनःचैनपुर बना आदर्श प्रखंड

रांची,8नवम्बर । झारखंड के जनजातीय इलाकों में हड़िया(मादक पेय) और दारु परंपरागत संस्कृति का एक हिस्सा है,लेकिन विकास में पिछड़ जाने वाले ग्रामीण अब नशापन को ही मुख्य रुप से जिम्मेवार मान रहे है और इसके खिलाफ कई हिस्सों में नशापन मुक्ति आंदोलन चलाया जा रहा है।
नशापान मुक्ति आंदोलन के तहत ही राज्य के गुमला जिले के चैनपुर प्रखंड को आदर्श प्रखंड घोषित किया गया है।
नशा मुक्ति अभियान में चैनपुर प्रखंड की प्रमुख उषा लिया तिग्गा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। उषा लिया तिग्गा ने बताया कि प्रखंड के बेंदोरा पंचायत के हरपत्ता टोली से इस आंदोलन की शुरुआत हुई। उन्होंने बताया कि प्रारंभ में गांव ही कुछ महिलाओं ने अपने घर से इस आंदोलन की शुरुआत की। महिलाओं ने पहले अपने पति को शराब पीने से रोका और गांव में शराब बनाने वाली भट्ठियों को तोड़ डाला गया। इसके बाद शराब पीने वाले और शराब बेचने वालों पर जुर्माना लगाया गया।
महिलाओं के इस नशामुक्ति अभियान को प्रशासन का भी पूरा सहयोग मिला। प्रशासन की ओर से इस आंदोलन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाये गए। जिले के उपायुक्त और उपविकास आयुक्त ने भी गांव-गांव जाकर इस आंदोलन को बढ़ावा देने का काम किया। जिला प्रशासन की ओर से सबसे पहले सिंदुआरी गांव को नशामुक्ति आंदोलन के लिए आदर्श गांव घोषित किया गया। बाद में धीरे-धीरे इस आंदोलन ने पूरे प्रखंड में जोड़ पकड़ लिया।

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