सुबोधकांत निकलेंगे ’परिवर्त्तन यात्रा’ पर

सभी विधानसभा क्षेत्रों का करेंगे दौरा
रांची,12नवंबर। केंद्रीय मंत्रिमंडल से त्यागपत्र देकर संगठन की जिम्मेवारी संभालने का निर्णय लेने के बाद सुबोधकांत सहाय ने अब राज्य में पार्टी संगठन को मजबूत आधार प्रदान करने तथा कांग्रेस कार्यकर्त्ताओं के आत्मसम्मान एवं स्वाभिमान की रक्षा के वास्ते पूरे झारखंड का भ्रमण करने की योजना बनायी है।
सांसद सुबोधकांत सहाय दीपावली, कालीपूजा, चित्रगुप्त पूजा और छठ के दौरान संगठन के कार्यकर्त्ताओं और अपने समर्थकों के साथ मिलकर भावी कार्यक्रमों की रुपरेखा तय कर रहे है, जबकि 22 नवंबर से शुरु हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में हिस्सा लेने के लिए वे दिल्ली चले जाएंगे। करीब चार दशक के राजनीतिक जीवन में सक्रिय रहने के कारण क्षेत्र्ा के एक-एक कार्यकर्त्ता को वे चेहरे और नाम से व्यक्तिगत रुप से जानते-पहचानते है। अब संगठन की जिम्मेवारी मिल जाने के बाद उन्होंने अपने पुराने संबंधों को फिर से मजबूत करने और संगठन को दुरुस्त करने की योजना बनायी है।
रांची के स्थानीय सांसद होने के नाते सुबोधकांत सहाय सभी विधानसभा क्षेत्रों की यात्रा पर निकलने से पहले अपने संसदीय क्षेत्र के हर पंचायतों का भ्रमण करने की भी योजना बनायी है। इस सिलसिले में उन्होंने फिलहाल प्रखंडों का भ्रमण शुरु कर दिया है और अगले कुछ दिनों में कार्यक्रमों की रुपरेखा तैयार कर एक-एक पंचायत और गांव भी जाएंगे। सुबोधकांत सहाय ने राज्य के दौरे के क्रम में दल के सभी विधायकों और पिछले विधानसभा चुनाव में चुनाव लड़ चुके कांग्रेस प्रत्याशियों तथा पार्टी के पुराने एवं समर्पित कार्यकर्त्ताओं के साथ-साथ युवाओं का भी सहयोग लेने की रणनीति बनायी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार इन कार्यक्रमों की शुरुआत के पहले सुबोधकांत सहाय को संगठन में अहम जिम्मेवारी भी मिल दिये जाने की संभावना है। बताया जा रहा है कि केंद्रीय मंत्र्ािमंडल से इस्तीफा देने के बाद उन्हें संगठन में भेजने की पुष्टि हो चुकी थी। इसी सिलसिले में पिछले दिनों रांची पहुंचने पर सुबोधकांत सहाय का ऐतिहासिक स्वागत हुआ। हवाईअड्डे पर उनके स्वागत के लिए इतनी भीड़ जुटी कि एयरपोर्ट के निकट की सभा का आयोजन करना पड़ा। उनके स्वागत के लिए राज्य भर के विभिन्न जिलों से पार्टी कार्यकर्त्ता रांची पहुंचे थे। इतनी भीड़ मंत्री रहने के दौरान कभी उनके स्वागत के लिए नहीं पहुंची थी, यहां तक कि जब वे मंत्री बने थे, तभी भी उनके स्वागत के लिए इतने लोग एकत्रित नहीं हुए थे, इससे उनका हौसला बढ़ा है।

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