भोजपुरी फिल्मों में गुणी लोगों की आवश्यकता: मनोज तिवारी

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रांची। भोजपुरी फिल्म अभिनेता मनोज तिवारी ने कहा है कि भोजपुरी फिल्म के व्यवसाय में हाल के दिनों में अच्छी वृद्धि हुई है, लेकिन भोजपुरी फिल्म व्यवसाय में गुणी लोगों की कमी के कारण व्यवसाय में अपेक्षित बढ़ोत्तरी नहीं हो पायी है। रांची दौरे पर आये मनोज तिवारी ने फिल्म उद्य्नोग से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर हमारे संवाददाता से विशेष बातचीत की। पेश है बातचीत के प्रमुख अंशः-
सवालः- हाल के वर्षाें में भोजपुरी फिल्म परि॰श्य में किस तरह का बदलाव आया है?

मनोज तिवारीः

कई भोजपुरी फिल्में हाल के दिनों में अच्छी सफलता हासिल की है। आज भोजपुरी फिल्म का व्यवसाय 2000 करोड़ रुपये सालाना हो गया है। पहले भोजपुरी फिल्म का इतना बड़ा व्यवसाय नहीं था। प्रतिवर्ष 60 ये 65 भोजपुरी फिल्में बन रही है और इन फिल्मों का बजट भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
सवालः भोजपुरी फिल्म के विकास को आप किस तरह देखते है?

मनोज तिवारीः

भोजपुरी सिनेमा ने 50वर्ष पूरे कर लिये है। सबसे पहली भोजपुरी फिल्म ’गंगा मैया तोहरे पियरी चढ़ाइबो’ बनी, उसके बाद 20वर्षाे तक एक-दो अन्य भोजपुरी फिल्में आयी, लेकिन यह फिल्म कब आयी, कब चली गयी, पता नहीं चलता है। इसके बाद 80 के दशक में ’नदियां के पार’ बनी। इस फिल्म ने भी अच्छा व्यवसाय किया, लेकिन वर्ष 2003 में भोजपुरी फिल्म ’ससुरा बड़ा पैसा वाला’ बनी। इसने पुराने सारे रिकॉर्ड को तोड़ दिया। फिल्म ने 50 करोड़ रुपये का बिजनेस किया, कोई भोजपुरी फिल्म इतनी सफल नहीं हुई थी। इस फिल्म ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये गये। हालांकि इससे पूर्व पहली भोजपुरी फिल्म ’गंगा मैया तोहरे पियरी चढ़ाइबो’ भी काफी दिनों तक चली, लेकिन उस वक्त सिनेमा हॉल में टिकट की कीमत बहुत कम थी, सिनेमा के क्षेत्र्ा का भी कोई खासा विकास नहीं हुआ था। इस कारण बहुत ज्यादा का व्यवसाय यह फिल्म नहीं कर पायी, लेकिन सिनेमा के इतिहास में यह एक सफल फिल्म मानी जाती है।
सवालः भोजपुरी सिनेमा का भविष्य आप किस तरह से देखते है?

मनोज तिवारीः

भोजपुरी सिनेमा उद्य्नोग का भविष्य काफी उज्जवल है। आने वाले समय में बनने वाली भोजपुरी फिल्मों का बड़ा बजट होगा। उन्होंने कहा कि आज जो स्थिति में भोजपुरी फिल्में अपनी क्षमता के अनुरुप प्रदर्शन नहीं कर पा रही है। भोजपुरी फिल्म के दर्शकों की संख्या काफी है, लेकिन आज भोजपुरी फिल्म कम बजट की बनती है, कई फिल्में 60-70 लाख में बन जाती है, जबकि हॉलीवुड की सफल फिल्मों का बजट करोड़ में होता है।
सवालः वर्तमान समय में भोजपुरी फिल्म के विकास के लिए आप क्या आवश्यक समझते है?

मनोज तिवारीः

कई भाषाओं में आज अच्छी फिल्में बन रही है। एक-एक बांग्ला सिनेमा में डेढ़ से दो करोड़ रुपये में बन रही है और कई फिल्में सफल हो रही है। जबकि भोजपुरी सिनेमा में गुणी लोगों की कमी है, यह दुःखद है। कभी-कभी तो मुझे स्वयं भी अपनी ही फिल्मों को देखकर जोर से झटका लगता है,क्योंकि फिल्म भोजपुरी फिल्म बनाने वाले निदेशक की क्षमता उतनी ही थी, यदि इस क्षेत्र्ा में गुणी लोग आते है, तो अच्छी फिल्में बन सकती है। अच्छी फिल्मों को बनाने के लिए पैसा भी आवश्यक है,क्योंकि तीन-चार करोड़ रुपये खर्च कर बनने वाली हॉलीवुड की फिल्में ही धमाल मचा रही है। भोजपुरी में भी अच्छी फिल्में बनेगी, तो पैसा खर्च होगा,क्योंकि अच्छी फिल्म बनाने वाले डायरेक्टर खुद ही 3 करोड़ रु. तक ले लेते है। भोजपुरी फिल्म का स्तर सुधारना है, तो प्रोड्यूसर को पैसा भी लगाना होगा।
सवालः भोजपुरी फिल्म के दर्शकों के संबंध में आप क्या कहना चाहेंगे?

मनोज तिवारीः

भोजपुरी फिल्म के दर्शकों की संख्या काफी है, अभी कोई सफल वॉलीवुड फिल्म को एक करोड़ लोग भी देख लेते है, तो वह फिल्म काफी सफल मानी जाती है, जबकि भोजपुरी दर्शकों की आबादी को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि यदि अच्छी भोजपुरी फिल्में बनती है, तो चार करोड़ दर्शक तक फिल्म को देख सकते है।

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