सीएनटी एक्ट में संशोधन , बैंकों से शिक्षा,गृह व व्यवसायिक ऋण मिलेगा

 
सीएनटी एक्ट की धारा 46(1) में संशोधन के तहत आदिवासी,अनुसूचित जनजाति भूमि बंधक रख कर ले सकेंगे कर्ज
hemant sorenरांची,10अक्टूबर। झारखंड सरकार ने में छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी,एक्ट) में संशोधन के तहत अनुसूचित जनजाति व अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों की एक बड़ी मुश्किल आसान कर दी है। अब सीएनटी एक्ट के दायरे में आने वाले अनुसूचित जनजाति व अनुसूचित जाति वर्ग के लोग अपनी भूमि को राष्ट्रीयकृत बैंकों में बंधक कर शिक्षा, गृह व व्यवसायिक ऋण ले सकेंगे।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आज राज्य मंत्र्ािपरिषद की हुई बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को आज मंजूरी दे दी गयी।बाद में पत्रकारों से बातचीत में कैबिनेट सचिव ने बताया कि राजस्व विभाग के एक प्रस्ताव के तहत छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम की धारा 46(1) के तहत अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति वर्ग के लोग अपनी भूमि को बैंकों में बंधक रखकर शिक्षा, गृह तथा व्यवसायिक ऋण ले सकेंगे। इसके लिए एक्ट में आवश्यक संशोधन के प्रस्ताव को कैबिनेट द्वारा मंजूरी प्रदान कर दी गयी है।
सीएनटी एक्ट के मौजूदा प्रावधान के तहत अनुसूचित जनजाति व अनुसूचित जाति के लोग अब तक जमीन बंधक रखकर सिर्फ कृषि ऋण ही ले सकते थे, लेकिन एक्ट में आवश्यक संशोधन हो जाने के बाद इस समुदाय के लोग अपनी जमीन को बंधक रखकर शिक्षा, गृह व व्यवसायिक ऋण भी मिल सकेगा। राज्य सरकार के इस फैसले से राज्य में रहने वाली एक बड़ी आबादी को शिक्षा, गृह व व्यवसाय के लिए बैंकों से कर्ज मिलने के कारण अब उनके जीवन स्तर में सुधार हो पाएगा। अभी तक कई डिसमिल या कई एकड़ जमीन रहने के बावजूद सीएनटी एक्ट के प्रावधान के कारण इस समुदाय के लोग न तो अपनी भूमि को बेच सकते थे और न ही इस जमीन के बदले बैंकों से ऋण ले सकते थे, लेकिन अब ऋण मिलने का प्रावधान हो जाने से उन्हें बड़ी राहत मिली है और जमीन रहने के बावजूद मुश्किलों का सामना कर रहे आदिवासियों की दिक्कतें अब दूर हो जाएगी।
कैबिनेट विभाग के प्रधान सचिव जे.बी.तुबिद ने बताया कि सीएनटी एक्ट के तहत कृषि ऋण लेने का प्रावधान है और यदि ऋण लेने वाला व्यक्ति कर्ज नहीं चुका पाता है, तो इसके लिए भी बैंकों को पर्याप्त अधिकार मिला है ,इसी के तहत बैंक अब इन्हें शिक्षा, गृह व व्यावसायिक ऋण ले सकेंगे।

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