झारखंड में रेलवे का जोनल कार्यालय खोलने का आग्रह

पूर्वी क्षेत्र अंतर्राज्यीय परिषद की बैठक

Patna JH _CM_03
रांची,16जनवरी।मुख्यमंत्री रघुवर दास ने आज पटना के संवाद भवन में पूर्वी क्षेत्र अन्तर्राज्यीय परिषद की बैठक में भाग लिया। उन्होंने कहा कि झारखण्ड एक लैण्ड लौक्ड राज्य है, जिस कारण राज्य के अंदर एवं बाहरी प्रदेश के लिए रोड कनेक्टीविटी मूलभूत एवं महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि एन0एच0-23 एवं एन0एच0-75 उड़ीसा, छत्तीसगढ़ तथा उत्तरप्रदेश को जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण है, एन0एच0-23 विशेषकर उड़ीसा बन्दरगाह को जोड़ने का एक बहुत ही महत्वपूर्ण मार्ग है। उक्त मार्ग में जुड़ने वाले सभी जिलों के क्षेत्र पिछड़ा, आदिवासी बाहुल्य एवं नक्सल प्रभावित होने के कारण भी इनका निर्माण अत्यन्त आवश्यक हो जाता है।
4मुख्यमंत्री ने झारखण्ड में रेलवे का जोनल 3कार्यालय खोले जाने का भी अनुरोध किया। उन्होंने राँची, बोकारो एवं जमशेदपुर के दुग्ध उत्पाद परियोजना एवं मवेशी चारा संयत्रं के स्वामित्व, पश्चिम बंगाल के साथ साहेबगंज जिले के 49 मौजों पर प्रतिवेदन तथा कोयले पर रॉयल्टी की बढ़ोत्तरी के संबंध में भी अपने विचार रखे। मुख्यमंत्री ने गंगा नदी पर पुल निर्माण के विषय में ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि यह एक लम्बे समय से लंबित मुद्दा रहा है। यह देश के उत्तर-पूर्व के लिये प्रवेश द्वारा खोलेगा और इससे विशेषकर झारखण्ड तथा बिहार दोनों राज्यों को फायदा होगा।
उन्होंने राज्य में चल रही रेल परियोजनाओं के संबंध में कहा कि राज्य में राँची-कोडरमा, रांची-लोहरदगा-टोरी, कोडरमा-तिलैया, कोडरमा-गिरिडीह, दुमका-रामपुर हाट और देवघर-दुमका रेल परियोजनाएं वर्ष 2002 से चल रही हैं जिनको वर्ष 2007-2013 के लिये अवधि विस्तार भी दिया गया है किन्तु इन परियोजनाओं को सम्पूर्ण ६प से पूरा किया जाना अभी भी शेष है, रेलवे द्वारा अवधि विस्तार की मांग के प्रस्ताव पर राज्य सरकार द्वारा सहमति प्रदान की गयी तथा रेल प्राधिकार को एम0ओ0यू0 पर हस्ताक्षर करने के लिए तारीख एवं समय सीमा तय करने हेतु सूचित भी कर दिया गया, लेकिन रेलवे मंत्रालय द्वारा राज्य सरकार को अब तक पत्र्ा का जवाब नहीं प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के अतिरिक्त आर्थिक मामलों की मंत्र्ािमंडल समिति ने गोड्डा-पीरपैंती रेलवे लाईन तथा हंसडीहा-जसीडीह रेलवे लाईन का निर्माण 50ः50 प्रतिशत की साझेदारी के आधार पर करने की स्वीकृति दी है। परिवहन विभाग झारखण्ड ने पूर्व में ही रेलवे प्राधिकार से विवरणी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है ताकि राज्य सरकार द्वारा एम0ओ0यू0 पर हस्ताक्षर करने के लिए अग्रेतर कार्रवाई की जा सके, किन्तु रेलवे मंत्र्ाालय का उत्तर अब तक प्रतीक्षित है।
उन्होंने बिहार एवं झारखण्ड के बीच पेंशन बंटवारे के संबंध में कहा कि पेंशन दायित्व के बंटवारे का निर्धारण उत्तराखण्ड एवं छत्तीसगढ़ राज्यों में जनसंख्या के आधार पर किया गया था। किन्तु, झारखण्ड के संबंध में इस सिद्धांत को नही अपनाया गया। जिसके कारण राज्य को नुकसान हुआ है।उन्होंने कहा कि सरकारी अभिलेखों में जंगल-झाड़ी के ६प में दर्ज सरकारी जमीन भी वन संरक्षण अधिनियम के तहत क्लीयरेंस के लिए वन भूमि की परिभाषा के अन्तर्गत लाए जाने के मामले को उठाते हुए कहा कि प्रतिपूरक वनीकरण के लिए गैर वन भूमि के अभाव में राज्य के विकास की परियोजनाएं लंबित हो रही हैं अथवा बंद हो रही है। केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की तरह राज्य सरकार को भी भूमि के हस्तांतरण से छूट दिया जाना वांछनीय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मादक दवाओं तथा नशीले पदार्थों के अवैध तसकरी के मामले में खुफिया जानकारी एवं सूचनाएं राज्यों को साझा करना सभी के लिए लाभदायक होगा। राज्यों के पुलिस, एक्साईज तथा नारकोटिक्स ब्यूरो के बीच नियमित संवाद स्थापित करने के लिए एक तंत्र बनाने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने झारखण्ड क्षेत्र के कैडेस्ट्रल नक्शे के हस्तांतरण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह मामला विभाजन के बाद से ही बिहार सरकार के साथ लंबित है।इस कारण भू-अभिलेख के कम्प्यूटरीकरण का कार्य बाधित है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखण्ड को पड़ोसी राज्यों जैसे उड़ीसा, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार आदि से जोड़ती नदी बेसिन के जल ग्रहण क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा रहता है। मॉनसून के दौरान, ओड़िशा, मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश में स्थित बांधो में जमा अतिरिक्त पानी के अचानक छोड़े जाने से झारखण्ड को खतरा उत्पन्नप्र होता है। पानी को छोड़ना अपरिहार्य है परन्तु यह मुमकीन है कि बहाव क्षेत्र्ा के वासियों को पूर्व में सूचना उपलब्ध करायी जाय ताकि समय से राहत एवं बचाव कार्य किया जाय तथा जान-माल का नुकसान कम से कम हो।

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