सिंदरी का उर्वरक कारखाना पुनर्जीवित होगा

रांची,21मई।केंद्र सरकार ने झारखंड स्थित सिंदरी उर्वरक प्लांट को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया है, इस पर करीब 6000 करोड़ रुपये की लागत आएगी। केंद्र सरकार ने असम में भी 4500करोड़ की लागत से नये उर्वरक प्लांट स्थापित करने का निर्णय लिया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार देश में उर्वरकों की कमी को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार लगातार कदम उठा रही है। गोरखपुर, तालचर व बरौनी स्थित खाद कारखानों को नए सिरे से संचालित करने का फैसला पहले ही किया जा चुका है। अब सिंदरी का भी पुनर्गठन सरकार करेगी। नामरुप (असम) में पीपीपी के तहत नया उर्वरक प्लांट लगाया जाएगा। इन पांच कारखानों की संयुक्त तौर पर उत्पादन क्षमता 73 लाख टन होगी। ये देश के पूर्वी हिस्से में हरित क्रांति का दूसरा दौर लाने में भी काफी मददगार साबित होंगे। पूर्वोत्तर समेत समूचे पूर्वी हिस्से में उर्वरक की जरुरत इन संयंत्र्ाों से पूरी हो सकेगी। साथ ही बांग्लादेश और नेपाल को यहां से निर्यात भी किया जा सकेगा।
अभी देश में हर तरह के उर्वरकों की खपत लगभग 310 लाख टन सालाना है जबकि उत्पादन 230 लाख टन है। आयात पर निर्भरता की वजह से ही पिछले दो वर्षों से देश के कई हिस्सों को उर्वरकों की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। सिंदरी खाद कारखाना संयुक्त बिहार का प्रमुख उर्वरक उत्पादक प्लांट हुआ करता था। झारखंड में होने वाले हर विधान सभा चुनाव में इसके पुनगर्ठन का मुद्दा काफी अहम रहता था। माना जा रहा है कि सिंदरी की नई फैक्ट्री से सीधे तौर पर 500 लोगों को और परोक्ष तौर पर 3000 लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।

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