ठेका मजदूर अधिनियम के खिलाफ विस में हंगामा

हंगामे के बीच ही चार विधेयकों को मिली मंजूरी,एक विधेयक विचार के लिए प्रवर समिति को सौंपी गयी, कांग्रेस विधेयक सुखदेव भगत ने शपथ ली, पेड़ कटाई मामले में कार्रवाई
रांची,21दिसंबर। झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पांचवें दिन आज विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के कारण भोजनावकाश के पहले सभा की कार्यवाही पूरी तरह से बाधित रही,जिसके कारण प्रश्नकाल, मुख्यमंत्री प्रश्नकाल, शून्यकाल और ध्यानाकर्षण सूचना पर कोई सवाल-जवाब नहीं हो सका। वहीं भोजनावकाश के पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) सदस्यों के हो-हंगामे के कारण सभा की कार्यवाही को दो बार स्थगित करना पड़ा। जबकि भोजनावकाश के बाद भी झामुमो सदस्यों का हंगामा जारी रहा और हंगामे के बीच ही चार विधेयकों को मंजूरी दे दी गयी, जबकि एक विधेयक को विचार के लिए प्रवर समिति को सौंपने का निर्णय लिया गया।
विधानसभा की कार्यवाही शुरु होने पर लोहरदगा विधानसभा उपचुनाव में निर्वाचित कांग्रेस विधयेक सुखदेव भगत को स्पीकर ने शपथ दिलायी। शपथ ग्रहण के बाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने विगत शुक्रवार को सभा द्वारा पारित ठेका मजदूर विनियय एवं उन्मूलन (झारखंड संशोधन) (संशोधन) विधेयक 2015 को मजदूर विरोधी करार देते हुए इस पर सरकार से पुनर्विचार करने की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस विधेयक को पिछले दिनों सभा में चर्चा हुई और इसे पारित कर दिया गया, तो अब यह विधेयक नियमानुकूल कानून बन चुका है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक इससे संतुष्ट नहीं हुए और अपनी बातों को कहते हुए समावेश्म (आसन के निकट) में आ गये।
झामुमो सदस्यों के शोर-शराबे के बीच ही झारखंड राज्य विश्वविद्य्नालय संशोधन विधेयक 2015 को सदन पटल पर रखा गया,जिसे झामुमो के कुणाल षाड़ंगी, झाविमो के प्रदीप यादव और भाजपा की विमला प्रधान ने प्रवर समिति को सौंपने का आग्रह किया। जिस पर विधानसभा अध्यक्ष ने इसे प्रवर समिति को सौंपने का नियमन दिया और 15 दिनों के अंदर समिति को प्रतिवेदन सौंपने का निर्देश दिया। सभा में आज झारखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन विधेयक, बाबा बैद्य्ननाथधाम-बासुकीनाथ तीर्थ क्षेत्र्ा विकास प्राधिकार विधेयक 2015, झारखंड नगरपालिका संशोधन विधेयक और झारखंड खनिज क्षेत्र विकास प्राधिकार संशोधन विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी गयी। सभा में आज राज्य में खाद्य्न सुरक्षा से उत्पन्न स्थिति पर विशेष वाद-विवाद का भी आयोजन किया गया।

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