नेत्रहीन,मूक-बधिर बच्चों के लिए अगले वर्ष से विशेष बजट

डायन-बिसाही की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए उपायुक्तों को दिया गया दिशा-निर्देश
7रांची,23दिसंबर।राज्य की कल्याण मंत्री लुईस मरांडी ने कहा कि प्रदेश में रह रहे नेत्रहीनों, मूक-बधिर बच्चें सातवीं कक्षा से आगे की पढ़ाई जारी रख सके,इसके लिए वर्ष 2016-17 के बजट से अलग से राशि का प्रावधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में भी इन बच्चों के लिए जो विशेष योजनाएं चल रही है,सरकार उसका अध्ययन कर राज्य में ही विशेष कैंपस विकसित करेगी। उन्होंने रामगढ़ में चल रहे नेत्र्ाहीन विद्य्नालय की सराहना की। उन्होंने बताया कि राज्य में डायन-बिसाही की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सभी जिलों के उपायुक्तों को यह सख्त निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्र में अकेले रहने वाले वैसे वृद्धजन पर विशेष नजर रखें, जिनका गांव-परिवार में भूमि विवाद का कोई मामला पहले से ही चल रहा है। राज्य सरकार के एक वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में डॉ. लुईस मरांडी आज अपने विभागों उपलब्धियों को लेकर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रही थीं।
डॉ. मरांडी ने विभाग की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए बताया कि प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनांतर्गत राज्य के 34,26,667 छात्रों को छात्र्ावृत्ति उपलब्ध करायी गयी, जिनके उपर 23375 लाख रुपये खर्च किये गये। उन्होंने राज्य में चल रही साईकिल वितरण योजना, पोशाक आपूर्ति योजना, आवासीय विद्य्नालय की उपयोगिता, राज्य में चल रहे एकलव्य व आश्रम विद्य्नालयों की सराहना की। डा. लुईस मरांडी का कहना था कि झारखंड गठन के बाद कुल 507 छात्रावासों के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गयी, जिनमें आज तक की स्थिति यह हैं कि 373 पूर्ण है और 134 अपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों के कल्याण संबंधी बातों को जमीन पर उतारने के लिए अब 15 सूत्री कमेटी का गठन कर दिया गया हैं। उन्होंने कहा कि वक्फ न्यायाधिकरण में केवल एक जज की नियुक्ति है, भवन निर्माण विभाग से जमीन मांगी गयी थी, पर उपलब्ध नहीं हो सका, फिर भी विभाग की ओर से कार्य जारी है, एक महीने के अंदर ही न्यायाधिकरण नये आवास में नजर आयेगा।
उन्होंने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास का सपना अनुसूचित जनजाति ग्राम विकास योजना है। झारखंड में अनुसूचित जन जाति के 80 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जनजाति बहुल के 5755 ग्रामों का चयन किया गया हैं, जिसके कायाकल्प हेतु उनका विभाग मुस्तैद हैं और हम यहां के विकास के लिए कृतसंकल्पित हैं। जनजातीय परामर्शदातृ समिति, अनुसूचित जनजाति विकास परिषद् का गठन उन्हीं में से एक हैं।
टीआरसी में शोधकर्मियों की कमी पर डा. लुईस मरांडी का कहना था कि सरकार का इस ओर ध्यान है, और सरकार इसके लिए विशेष प्रयास कर रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कल्याण विभाग द्वारा निर्मित 5 अस्पतालों मननचोटाग ॰लातेहार, बानो-सिमडेगा, बड़ाचिरु-चाईबासा, नागफेनी-गुमला और लोदाडीह-चक्रधरपुर में बन कर तैयार हैं, जल्दी ही इसे संचालन किया जायेगा। डा. लुईस मरांडी ने कहा कि कल्याण विभाग की ओर से नवंबर माह तक 51 प्रतिशत और समाज कल्याण विभाग में 42 प्रतिशत राशि खर्च की गयी हैं, शेष राशि आगामी तीन चार महीनों में खर्च हो जायेगी। उन्होंने कहा कि उनके विभाग में भ्रष्टाचार के मामले आते है, और उस पर शिकंजा भी कसा जा रहा हैं। उसी का परिणाम हैं कि ऑनलाइन सिस्टम को चुस्त-दुरस्त किया जा रहा हैं। हाल ही में साईकिल के लिए तथा पोशाक के लिए डायरेक्ट राशि उपलब्ध करने की योजना भ्रष्टाचार रोकने के लिए ही शुरु की गयी है, फिर भी अगर इस मामले में भ्रष्टाचार की शिकायत आती हैं तो जनता सहयोग करें, सरकार किसी को भी नहीं छोड़ने जा रही।
उन्होंने पूरक पोषाहार कार्यक्रम, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, डायन प्रथा उन्मूलन, किशोरी बालिकाओं तथा धाइयो को एंटी ट्रेफिकिंग से बचाव के लिए पुनर्वास केन्द्र, स्वामी विवेकानन्द निशक्त स्वावलंबंन प्रोत्साहन योजना, समेकित बाल संरक्षण योजना, संप्रेक्षण गृहों में विडियो कांफ्रेसिंग की सुविधा बहाल करने, बाल गृह के संचालन, नारी निकेतनों के संचालन, प्रेमाश्रय के संचालन, महिला हेल्पलाइन्स, तेजस्विनी योजना, राज्य पोषण मिशन आदि में चल रहे सुधार कार्यक्रमों की भी चर्चा की।

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