तीर-धनुष के साथ डंडा भी उठाना होगाःहेमंत सोरेन

रांची,16मार्च।झारखंड मुक्ति मोर्चा(झामुमो) के कार्यकारी अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने कहा है कि राज्य सरकार बौद्धिक रुप से लड़ाई लड़ रही है, पार्टी इस तरह की लड़ाई लड़ नहीं सकती, इसलिए तीर-धनुष के साथ अब डंडा भी उठाना होगा।
विधानसभा स्थित अपने चेंबर में पत्र्कारों से बातचीत में कहा कि बजट सत्र प्रारंभ होने से लेकर आज तक कई विषय सदन में आए, जिसमें मुख्य रुप से स्थानीय-नियोजन नीति, जेपीएससी परीक्षा, ईचा-खरकई डैम और भूमि अधिग्रहण का विषय शामिल है। उन्होंने कहा कि आज उन्हें जानकारी मिली है कि झारखंड उच्च न्यायालय ने पांचवीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की अनुशंसा पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगाने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार खुद इस मामले पर संज्ञान लेकर फैसला ले सकती थी, लेकिन गरीब, आदिवासियों एवं मूलवासियों के बच्चों को कोर्ट भेज कर उन्हें प्रताड़ित करने का षड़यंत्र् किया गया। उन्होंने बताया कि स्थानीयता के जिस मुद्दे को पार्टी उठा रही है,उसी मुद्दे पर भाजपा-आजसू के नेता घड़ियाली आंसू बहा रहे है, एक ओर भाजपा के कई विधायक इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिख रहे है, वहीं दूसरी ओर आजसू पार्टी नेता धरना दे रहे है। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष की ओर से 73 प्रतिशत आरक्षण की मांग की जाती है, तो उन्हीं के बगल में बैठे मंत्र्ाी मुस्कराते है और आज आरक्षण का दायरा बढ़ाने के लिए धरना पर बैठे है। उन्होंने आजसू पार्टी पर आरक्षण और स्थानीयता के मुद्दे को लेकर राजनीतिक दुकानदारी चलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सत्तापक्ष की ओर से जेपीएससी परीक्षा में जनजातीय भाषा को लेकर झामुमो के नेतृत्व की पिछली सरकार पर जो सवाल उठाया जा रहा है, उस वक्त ही उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए जनजातीय भाषा को शामिल करने को पत्र लिखा था, लेकिन इसके बावजूद गलत प्रस्ताव बनाकर कुछ अधिकारियों ने उनसे हस्ताक्षर करा लिया और अब मुख्यमंत्री के लिए हरेक पन्नों को पढ़ना संभव नहीं होता है, ऐसे अधिकारियों को चिन्हित कर दंडित किया जाए।
हेमंत सोरेन ने कहा कि झामुमो यह जानता है कि हक और अधिकार कैसे लेना है,इसे लेकर आंदोलन भी लड़ा गया है, स्थानीयता को लेकर पार्टी फिर से आंदोलन करेगी। स्थानीयता के मसले पर मुख्यमंत्री द्वारा विपक्षी दलों से लिखित सुझाव मांगे जाने संबंधी बयान पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री झूठ बोलते है, वे पहले भी सदन में यह दे चुके है कि इस तिथि तक स्थानीय नीति को लागू कर दिया जाएगा, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि झामुमो नेतृत्व वाली सरकार के समय ही स्थानीय नीति का मॉडल बनाकर दे दिया गया है और अब इसे आकृति देना(मूर्त्त रुप देना) राज्य सरकार का काम है।

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