दलमा वन्यजीव अभ्यारण्य इको-सेन्सिटीव घोषित

केंद्र ने 275 इको-सेन्सिटीव जोन घोषित किया, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री ने राज्य सभा सांसद परिमल नथवाणी के प्र न के उत्तर में दी जानकारी
रांची,25अप्रैल। केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने देश में 275 इको-सेन्सिटीव जोन (पारिस्थितिकीय संवेदनशील क्षेत्र) घोषित करने के प्रस्ताव पारित किए। जिसमें गुजरात के छ इको-सेन्सिटीव जोन और झारखण्ड का एक इको-सेन्सिटीव जोन शामिल है। केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री प्रकाश जावडेकर ने अप्रैल 25, 2016 को राज्य सभा में सांसद परिमल नथवाणी के प्रश्न के उत्तर में राज्य सभा में यह बताया।
उन्होंने बताया कि विभिन्न राज्य सरकारों से वन्यजीव अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्य्नानों के आस-पास पारिस्थितिकीय रुप से संवेदनशील क्षेत्रों (इको-सेन्सिटीव जोन) को घोषित करने के 282 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। गुजरात में घोषित किए गये छः पारिस्थितिकीय रुप से संवेदनशील क्षेत्र्ा मरीन राष्ट्रीय उद्य्नान और मरीन वन्यजीव अभयारण्य, गिरनार वन्यजीव अभयारण्य, नारायण सरोवर वन्यजीव अभयारण्य, वांसदा राष्ट्रीय उद्य्नान और थोल वन्यजीव अभयारण्य की सुरक्षा के लिए है। झारखण्ड में एक पारिस्थितिकीय रुप से संवेदनशील क्षेत्र डालमा वन्यजीव अभयारण्य के आस-पास के इलाकों की सुरक्षा के लिए है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अब तक मंत्रालय ने वन्यजीव अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्य्नानों के आस-पास पारिस्थितिकीय रुप से संवेदनशील क्षेत्र्ाों की घोषणा करने के लिए 275 प्रस्ताव अनुमोदित व अधिसूचित किए हैं जिनमें से 215 प्रस्ताव भारत के राजपत्र में अधिसूचित किए गए हैं, जिनमें से 183 प्रारुप अधिसूचनाएं हैं और 32 अंतिम अधिसूचनाएं हैं। इन 275 प्रस्तावों में 404 वन्यजीव अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्य्नानों के आस-पास पारिस्थितिकीय रुप से संवेदनशील क्षेत्र शामिल हैं, ऐसा उन्होंने बताया ।
उन्होंने ने बताया कि पारिस्थितिकीय रुप से संवेदनशील क्षेत्र्ा (इको सेन्सिटीव जोन) की संकल्पना में जैव-विविधता और संकटापन्न वन्यजीवों को संरक्षित करना तथा क्षेत्र के तर्कसंगत सामाजिक-आर्थिक विकास को अवरुद्ध किए बिना ?सुरक्षा क्षेत्र’ के रुप में राष्ट्रीय उद्य्नानों और वन्यजीव अभयारण्यों जैसे संरक्षित क्षेत्रों के आस-पास पर्यावरण को सुरक्षित करना और स्थानीय लोगों की आजीविका को सुरक्षित करने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध करना भी है। ?पारिस्थितिकीय रुप से संवेदनशील क्षेत्र’ अधिसूचित करने कि प्रक्रिया में क्षेत्र्ा की जैविक विविधता और उसका संरक्षण, वन्यजीव अभयारण्य और राष्ट्रीय उद्य्नान तथा वन्यजीव गलियारों की निकटता पर विचार किया जाता है।
केंद्रीय मंत्री ने ने यह भी बताया कि वन्यजीवों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली कतिपय अभिज्ञात परियोजनाओं व कार्यकलापों पर प्रतिबंध लगाया जाता है और पारिस्थितिकीय रुप से संवेदनशील क्षेत्रों में पारिस्थितिकीय रुप से हितैषी कार्यकलापों को बढ़ावा दिया जाता है। पारिस्थितिकीय रुप से संवेदनशील क्षेत्र के विस्तार को निर्धारित करते समय स्थानीय लोगों की आजीविका के मुद्दों पर विचार किया जाता है।

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