गृहस्थाश्रम में रहकर भी योगी बना जा सकता है – द्रौपदी मुर्मू

रांची,19जून। योग का अभिप्राय हैं जोड़ना, शरीर को आत्मा से और आत्मा को परमात्मा से। जैसे नदियों का अंतिम गंतव्य सागर है, उसी तरह आत्मा का अंतिम गंतव्य परमात्मा का हो जाना है। योग जीने की कला सिखाती है, जो सीख गया, उसने अपना जीवन सफल कर लिया। आत्मा शरीर में रहती है और जब तक शरीर स्वस्थ नहीं होगा, आत्मा कुछ भी नहीं कर सकती, इसलिये योग के माध्यम से शरीर को स्वस्थ रखते हुए आत्मा को पुनः जागृत करते हुए परमात्मा की प्राप्ति ही योग है। उक्त बातें आज योगदा आश्रम में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कही।
उन्होंने योग की विशिष्टता को परिभाषित करते हुए कहा कि जरा सोचिये भगवान शिव ने भी तो पार्वती के साथ विवाह कर गृहस्थ आश्रम में प्रवेश किया, भगवान कृष्ण ने भी गृहस्थाश्रम अपनाया और जब ये दोनों गृहस्थाश्रम में रहकर स्वयं को योगी और योगेश्वर कहला सकते है तो हम गृहस्थाश्रम में रहकर योगी क्यों नहीं बन सकते, आवश्यकता है भ्रम को दूर करने की और सत्य को स्वीकार करने की। उन्होंने कहा कि आज हर व्यक्ति तनाव में है, हर व्यक्ति तनाव से मुक्त होना चाहता है और इस तनाव से सही प्रकार से मुक्ति गर कोई दिला सकता है तो वह सिर्फ योग है। राज्यपाल महोदया ने योग को जन दृ जन तक पहुंचाने के लिए परमहंस योगानन्द और भारत के अनेक मणीषियों को साधुवाद दिया, साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा योग को पूरे विश्व में आलोकित करने के लिए विशेष रूप से उनको धन्यवाद दिया। द्रौपदी मुर्मू ने स्पष्ट रूप से कहा कि योग सबके लिए है, और ये सर्वे भवन्तु सुखिनः को परिलक्षित करता है।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को है पर दो दिन पूर्व से ही अंतराष्ट्रीय योग दिवस मनाना, गर्व की बात है और वह स्वयं इस पल का हिस्सा बनकर गौरवान्वित महसूस कर रही है। उन्होंने योगदा आश्रम द्वारा देश-विदेश में योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए किये जा रहे कार्यक्रमों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने पिछले वर्ष राजभवन में योगदा आश्रम के सन्यासियों द्वारा योग दिवस मनाने और राजभवन के लोगों को योग की शिक्षा देने का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी नजर में योग जीवन को कायाकल्प करता है, इससे मनुष्य का शारीरिक और मानसिक विकास होता है, साथ ही यह चरित्र निर्माण में भी सहायक है। राज्यपाल महोदया ने योग के लिए योगदा आश्रम, रामकृष्ण मिशन, प्रजापति ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विद्यालय, पतंजलि और आर्ट आफ लिविंग ऐसे केन्द्रों की विशिष्ट भूमिका की भी प्रशंसा की। उन्होंने सभी को आह्वान किया कि वे योग को अपनाएं और स्वयं को स्वस्थ रखे, क्योंकि स्वस्थ भारत की कल्पना तभी साकार होगी, जब हम योग को अपनायेंगे।
योगदा आश्रम के स्वामी स्मरणानंद गिरि ने योग की सार्थकता, परमहंस योगानन्द की योग के लिए किये गये कार्य को आम जनमानस के बीच रखा, साथ ही श्रीमद्भगवद्गीता का दृष्टांत देते हुए भगवान कृष्ण और अर्जुन का संवाद जनता के बीच रखा और कहा कि भगवान कृष्ण ने श्रीकृष्ण को योग की ही शिक्षा दी और कहा कि बिना योग के कुछ भी नहीं हो सकता, इसलिए योग की सार्थकता को उन्होंने अर्जुन को समझाया, अर्जुन ने योग का विशिष्ट अर्थ समझा और फिर वे स्वयं को अनुप्राणित कर सकें। धन्यवाद ज्ञापन योगदा आश्रम के स्वामी श्रद्धानन्द ने किया।

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