हर-हर महादेव के जयघोष के साथ श्रावणी मेला शुरु

वासुकीनाथधाम में भी राजकीय श्रावणी मेले की शुरुआत
रांची,19जुलाई। झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्य्ननाथधाम मंदिर में आज वैदिक मंत्रोच्चार के बीच राजकीय श्रावणी मेले 2016 की शुरुआत हुई। राज्य के नगर विकास मंत्री सीपी सिंह और पर्यटन मंत्री अमर कुमार बाउरी ने झारखंड-बिहार की सीमा पर दुम्मा गेट के निकट फीटा काट कर मेले का शुभारंभ किया। इस मौके पर मंत्री राज पालिवार, मंत्री रणधीर सिंह और सांसद निशिकांत दूबे , विधायक बादल पत्रलेख, नारायण दास, उपायुक्त अरवा राजकमल भी मौजूद थे। इस मौके पर मंत्री व अन्य अतिथियों ने बाबा मंदिर में पूजा-अर्चना भी की और झारखंड की खुशहाली की कामना की। इसके साथ ही दुमका स्थित बाबा वासुकीनाथ धाम मंदिर में भी राजकीय श्रावणी मेले की शुरुआत हो गयी।
मंत्री सीपी सिंह व अमर बाउरी ने इस मौके पर बाबा भोलेनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं के प्रवेश मार्ग और निकास, सुरक्षा व्यवस्था, पूजा अर्चना करने की व्यवस्था समेत अन्य तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने देवघर जिला प्रशासन और सुरक्षा में तैनात अधिकारियों को प्रत्येक दिन की व्यवस्था पर नजर बनाये रखने का निर्देश दिया। इस मौके पर अधिकारियों ने श्रावणी मेले को लेकर की गयी पूरी व्यवस्था से मंत्री को अवगत कराया।
बाबा मंदिर में आरंभिक पूजा के बाद सुबह 4.15बजे बाबा बैद्य्नानाथधाम और वासुकीनाथधाम मंदिर में जलार्पण शुरु हुई। जलार्पण के लिए देवघर में कांवरियों की कतार का अंतिम छोर पहले ही दिन नेहरु पार्क से चिल्ड्रेन पार्क तिवारी चौक से आकर बीएड कॉलेज तक जा पहुंचा, जबकि वासुकीनाथधाम मंदिर में सटे संस्कार मंडप तक कांवरियों की लंबी कतार लगी रही। मेले में तैयारियों पर नजर रखने के लिए देवघर के उपायुक्त अरवा राजकमल और पुलिस अधीक्षक विजयालक्ष्मी तथा दुमका के उपायक्त राहुल कुमार सिन्हा और एसपी प्रभात कुमार सुबह से ही जायजा ले रहे थे।

सावन का पवित्र आज से शुरु
20जुलाई से सावन का पवित्र माह शुरु हो रहा है। माना जाता है कि इस माह जो भक्त कांवर में गंगाजल लेकर बाबा बैद्य्ननाथ धाम में शिवलिंग पर जलाभिषेक करते है,उनकी हर मनोकामना पूरी होती है।इसलिए यहां हर साल लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।

मुख्य प्रसाद है पेड़ा
बाबा बैद्य्ननाथ धाम का मुख्य प्रसाद पेड़ा है। सावन महीने में करीब 15 करोड़ रुपये के पेड़े की बिक्री होती है। फिलहाल 300 रुपये से 500 रु. प्रति किलो के भाव से पेड़ा बिक रहा है। श्रावणी मेले में हर साल करोड़ों रुपये का व्यापार सिर्फ बाबाधाम में होता है, यहां आने वाले श्रद्धालु प्रसाद के रुप में पेड़ा जरुर खरीदते है। इसके अलावा इलाईचीदाना, रायपुरी चूड़ा, सिंदूर, चूड़ी, लहठी व लोहे के बर्त्तन की भी खूब बिक्री होती है। जानकारों के अनुसार इलाईचीदाना व चूड़ा की औसत बिक्री 50लाख रुप से अधिक है, वहीं सिंदूर व चूड़ी लहठी का व्यापार भी 5 करोड़ के लगभग है। जबकि मेले में अन्य सामानों की बिक्री भी करोड़ों में होती है।

60लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना
देवघर स्थित बाबा बैद्य्ननाथधाम मंदिर में पूजा-अर्चना व जलाभिषेक के लिए सावन महीने में करीब 60लाख श्रद्धालुआें के पहुंचने की संभावना है। पिछले वर्ष सरकारी गणना के अनुसार यहां करीब 50लाख श्रद्धालु पहुंचे थे और इस बार संख्या में बढ़ोत्तरी की संभावना है। मेले में उमड़ने वाली भीड़ के मद्देनजर रेलवे द्वारा एक महीने तक कई विशेष ट्रेनों की व्यवस्था की गयी है।

पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंगां में शामिल
बाबा बैद्य्ननाथधाम की गिनती देश के पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंगों में की जाती है। शास्रों में भी बैद्य्ननाथधाम की महिमा का विस्तृत वर्णन किया गया है। साथ ही साथ यहां शिव और शक्ति दोनों की मौजूदगी है। देश के सभी द्वादश ज्योतिर्लिंगों में बैद्य्ननाथधाम स्थित ज्योतिर्लिंग को कामना लिंग के रुप में भी जाना जाता है। शास्रों के अनुसार आत्मलिंग से जिन 12 ज्योतिर्लिंगों का प्रादुर्भाव हुआ, उनमें बैद्य्ननाथधाम स्थित पवित्र ज्योतिर्लिंग को मूल लिंग माना जाता है। तीर्थ पुरोहित पं0 दुर्लभ मिश्रा ने बताया कि देवघर में शिव और शक्ति एक साथ विराजमान है। ऐसी मान्यता है कि सती का अंग जहां-जहां गिरा, वहां उस अंग की रक्षा के लिए एक-एक भैरव की स्थापना हुई और वही शक्तिपीठ कहलाया। देवघर में माता सती का अंग गिरा था और उसकी रक्षा के लिए स्थापित भैरव ही बैद्य्ननाथ है। देवघर में शक्ति नवदुर्गा के रुप में और भैरव साक्षात शिव के रुप में विराजमान है।

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