स्थानीय नीति को लेकर आजसू पार्टी का 8 से 14 तक जनमत संग्रहःसुदेश


रांची,7अगस्त। आजसू पार्टी प्रमुख और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो ने राज्य सरकार द्वारा घोषित स्थानीय नीति को जनभावना के विरुद्ध करार देते हुए 8 से 14 अगस्त के बीच पूरे प्रदेश में जनमत संग्रह चलाने का निर्णय लिया है।
सुदेश कुमार महतो ने आज रांची में जन की बात कार्यक्रम की शुरुआत करने के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि तीन चरणों में चलने वाले इस कार्यक्रम की शुरुआत कल 8 अगस्त को शहीद निर्मल महतो की शहादत दिवस से होगी। इसके तहत पोस्टकार्ड के माध्यम से राज्य भर के पांच लाख लोगों का विचार आमंत्रित किया जाएगा और उसके डाक द्वारा मुख्यमंत्री को भेजेगा। उन्होंने बताया किपूरा अभियान 15 नवंबर को संपन्न होगा और अगले दो चरणों के कार्यक्रम की घोषणा बाद में की जाएगी। सुदेश महतो ने बताया कि 9 अगस्त को ’विश्व आदिवासी दिवस’ पर दुमका में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित कर इसे शुरु किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 100 सेवा वाहन प्रदेश के 5 लाख लोगों के बीच जाएंगे। विभिन्न स्थानों पर शिविर लगाकर पोस्टकार्ड के माध्यम से लोगों का विचार जाना जाएगा। कुल 1 हजार पार्टी के स्वंयसेवक इस कार्य में जुटेंगे।
आजसू पार्टी प्रमुख ने कहा कि जनभावना का अनादर कर कोई नीति व नियम नहीं बन सकता है। हो सकता है कि भाजपा के लिए राष्ट्रीय परिपेक्ष्य में इसका संसोधन मुश्किल हो, लेकिन झारखंड आंदोलन व इसके गठन के परिपेक्ष्य में वर्तमान नीति सही नही है। लोकतंत्र में को भी सरकार जनभावना को अनादर कर नहीं चल सकती है, आजसू यह मानती है कि यह नीति जनभावना के अनुरुप नहीं है, एक जिम्मेवार सहयोगी व जिम्मेवार झारखंडी राजनीति दल होने के नाते पार्टी इसमें संसोधन चाहती है। यही कारण है कि पूर्व में सीएम से मिलकर इसमें संसोधन की मांग की गई थी।
सीएनटी-एसटीपी एक्ट में संसोधन के संबंध में पूछे गये एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि इससे एक खास व्यवसायिक वर्ग को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि पूरे देश में यह आदिवासियों के विरुद्ध लिया गया एक बड़ा निर्णय है। इसे मान्य नहीं किया जा सकता है। उन्होंने पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग करते हुए कहा कि यह अब समय की मांग है। कानून अचड़न भी समाप्त हो चुकी है इसलिए आरक्षण का दायरा बढ़ सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम खुला पत्र जारी कर इसमें संसोधन को जरुरी बताया है। उन्होंने कहा कि अनुसूची जिले में शत प्रतिशत नौकरी स्थानीय के लिए आरक्षित हो गए। मगर झारखंड के 5 जिले ऐसे हैं जहां पिछड़ा वर्ग के लिए सरकारी नौकरियों में कोई आरक्षण नही है।

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