फिल्म समिति में पॉलिटिक्स नहीं आने देंः अनुपम खेर

झारखंड फिल्म तकनीकी सलाहकार समिति की पहली बैठक संपन्न
रांची,2सितंबर। फिल्म अभिनेता और पù भूषण अनुपम खेर ने कहा है कि झारखण्ड में नई फिल्म नीति बनी है, और उस नई फिल्म नीति के आधार पर आज तकनीकी सलाहकार समिति की पहली बैठक है। समिति की कोशिश होगी कि इस अच्छे कार्य में पालिटिक्स को नहीं आने दें, क्योंकि पालिटिक्स जैसे ही आयेगी, काम प्रभावित होगा।वे आज रांची के सूचना भवन में आयोजित झारखण्ड फिल्म तकनीकी सलाहकार समिति की प्रथम बैठक सह सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि समिति ऐसा काम करें, जिससे एक नया आयाम स्थापित हो, ताकि यह राज्य पूरे देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी एक नया आयाम स्थापित करें। उन्होंने कहा कि उनके पिता क्लर्क थे, एक छोटे से कमरे में रहते थे। उन्होंने सपने देखे और उन सपनों को पूरा किया। सपने देखने चाहिए और सपने पूरे भी करने चाहिए पर इसके लिए सबका साथ और सबका विश्वास जरुरी है। श्री खेर ने कहा कि जो उन्हें रिस्पासिंबिलिटी दी गयी है, वे कोशिश करेंगे कि उन्हें पूरा करें। उम्र 90-95 की हो या 70-75 की, को मायने नहीं रखता, अगर आप सीखना चाहते हैं तो हर उम्र में सीखने की कला का होना जरुरी है।उन्होंने कहा किझारखण्ड में टैलेंट है, क्योंकि जब उन्होंने धौनी व गुंडे और गुड़िया फिल्म की शूटिंग कर रहे थे तो यहां के बहुत सारे कलाकारों के साथ काम करने का अवसर मिला।
अनुपम खेर ने कहा कि कहा कि वे यहां के अधिकारियों, सामाजिक व सांस्कृतिक कलाकारों और यहां के लोगों की सादगी देखकर अभिभूत हुए है। श्री खेर के कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है, हमने सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग के चार लोगों को सम्मान दिया है, क्योंकि उन्होंने बेहतर कार्य किये, जो बताता है कि राज्य के उत्थान के लिए हमें क्या करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे कश्मीर के रहनेवाले है, पर हिमाचल में पले-बढ़े, ये अलग बात है, पद्म भूषण मिला, पर वे आम आदमी के रुप में ही ज्यादा दिखना चाहते है। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि झारखण्ड जैसा राज्य जो फिलहाल पनपने की स्थिति में है, इसे और आगे बढ़ाना हम सबकी जिम्मेदारी है, इसलिए उन्होंने झारखण्ड को चूना, स्वीकार किया और हम इसे बेहतर स्थिति में आप सबके सहयोग से ले आयेंगे।
सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने अनुपम खेर का स्वागत करते हुए कहा कि वे किसी भी परिचय के मोहताज नहीं। वे फिल्मों और टीवी के माध्यम से हर जगह मौजूद है, इसलिए उन्हें नहीं लगता कि वे पहली बार उनसे मिल रहे है, लगता है कि कल की ही बात हो। अनुपम खेर जी की सादगी और उनका चरित्र बहुत कुछ कह देता है। उन्होंने कहा कि बचपन में उनकी फिल्म सारांश देखी थी, जो उन्हें बहुत प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि इंसान का चरित्र ही उसकी बड़ी पूंजी है, जब आप विपरीत परिस्थितियों में रहकर भी आप बिना किसी समझौते के अपने चरित्र की मदद से आगे बढ़ते है तो आप का असली व्यक्तित्व निखर कर सामने आता है। चरित्र की परीक्षा विषम परिस्थितियों में ही होती है। अनुपम खेर बहुत बड़ी व्यस्त व्यक्ति है, पर उसके बावजूद भी झारखण्ड के लिए उन्होंने समय निकाला, ये राज्य के लिए बड़ी बात है।

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