सरहुल पर भव्य शोभा यात्रा , अच्छी बारिश की भविष्यवाणी

रांची,30मार्च। प्रकृति पर्व सरहुल आज राजधानी रांची समेत राज्य भर में पारंपरिक रीति-रिवाज और हर्षाल्लास के साथ संपन्न हुआ और भव्य शोभायात्रा निकाली गयी। जनजातीय पर्व सरहुल के मौके पर रांची के मुख्य पाहन ने पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद इस साल अच्छी बारिश की भविष्यवाणी की गयी है। वहीं शोभायात्रा को लेकर सुरक्षा में पुख्ता इंतजाम किये गये थे और पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना के साथ ही नृत्य-संगीत के साथ सरना आदिवासियों ने शोभायात्रा में हिस्सा लिया।

पहान की भविष्यवाणी-इस साल होगी अच्छी बारिश
राजधानी में सरहुल के विधान और घड़े में रखे जल की पद्धति को देखने के बाद प्रमुख पहान जगलाल पाहन ने भविष्यवाणी की है कि इस साल अच्छी बारिश होगी। रांची के हातमा स्थित सरना स्थल पर प्रमुख पहान जगलाल पहान ने घड़े में रखे पानी को देखकर भविष्यवाणी की है कि इस वर्ष खासकर उत्तरी दिशा में अधिक वर्षा होगी और अच्छी बारिश किसानों के लिए लाभकारी साबित होगा। जगलाल पहान द्वारा केकड़ा भी पकड़ कर लाया गया था, इसका अपना अलग महत्व है। रीति-रिवाज के साथ पूजा-अर्चना कर केकड़े को पूजा स्थल पर रखा गया और उसकी बुकनी तैयार कर पहली फसन बोने से पहले इसे खेतों में डाला जाता है,ताकि खेती अच्छी हो।
इस बीच रांची कॉलेज स्थित जनजातीय विभाग में भी आज प्रकृति पूर्व सरहूल पूरे धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर रांची विश्वविद्य्नालय के कुलपति रमेश पांडेय, रजिस्ट्रार अमर कुमार चौधरी और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा समेत कई गणमान्य लोग मौजूद थे। सरहुल पर्व के मौके पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने सभी से प्रकृति से प्रेम करने और प्रकृति को बचाने की अपील की। शहर के विभिन्न अखाड़ों में आज सुबह सभी सरना स्थलों पर जनजातीय विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गयी और दोपहर बाद विभिन्न अखाड़ों ने भव्य शोभायात्रा में हिस्सा लिया। सरहुल पूजा को लेकर रांची और आसपास के अलग-अलग क्षेत्रों से सरना धर्मावलम्बी परंपरागत नृत्य और वेशभूषा के साथ शोभायात्रा के रुप में केन्द्रीय सरना स्थल सिरमटोली पहुंचे।

हातमा से निकाली गयी शोभायात्रा
राजधानी रांची में मुख्य शोभायात्रा कांके स्थित हातमा सरना स्थल से निकाली गयी, जो सिरमटोली सरना स्थल पहुंच कर संपन्न हो गयी। इस शोभायात्रा में हजारों की संख्या में सरना आदिवासी शामिल हुए, वहीं भव्य शोभायात्रा को देखने के लिए भी सड़क के दोनों ओर विभिन्न मकानों की छतों पर हजारों की संख्या में पुरुष व महिलाएं एकत्रित हुई थी। शहर में मुख्य शोभायात्रा निकाले जाने के दौरान इस मार्ग पर और विभिन्न मुख्य सड़कों पर वाहनों का परिचालन बंद रहा। मुख्य शोभायात्रा राजधानी में नयासराय, नामकुम, बड़ा घाघरा, डोरंडा, चुटिया, सिरमटोली समेत कई क्षेत्रों से निकाली गयी,जिसमें हजारों की संख्या में स्त्री-पुरुष परंपरागत नृत्य व जनजातीय संगीत के साथ शामिल हुए।

जनजातीय नृत्य-संगीत के साथ पूजा-अर्चना
इससे पहले उपवास और प्रार्थना के साथ प्रकृति पर्व सरहुल की शुरुआत हुई। इस दौरान सरना धर्मावलम्बियों की ओर से विभिन्न मौजा और सरना स्थलों में पाहन और पूजा में बैठने वाले सदस्यों ने उपवास के साथ सरना स्थलों की साफ-सफाई की। वहीं, पाहन और उसके सहयोगियों ने जल स्रोतों में जाकर मछली और केंकड़ा पकड़ कर पूजन विधि की परंपरागत शुरुआत की। सरना धर्मावलम्बियों की मान्यता है कि पूजन विधि के बाद खेतों में इनका समर्पण करने के बाद लहलहाते फसल की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। पूजा-अर्चना के बाद शोभायात्रा निकाली गयी, इस दौरान हजारों की संख्या में जनजातीय महिलाएं, पुरुष, युवा-बच्चे व बुजुर्ग ढोल-बाजे के साथ नृत्य करते नजर आये।
सरहुल के अवसर पर रांची का मेन रोड सरना झंडों से पटा नजर आया। दोपहर बाद सरहुल शोभायात्रा गुजरी।शोभायात्रा क ेदौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये थे। पर्याप्त संख्या में दंडाधिकारियों के नेतृत्व में जवानों की तैनाती की गयी थी। सीसीटीवी कैमरे से शोभायात्रा पर नजर रखी गयी। इसके अलावा ड्रोन कैमरे की भी सहायता ली गयी। सरहुल पर्व को देखते हुए जुलूस खत्म होने तक शहर में बड़ी गाड़ियों के परिचालन पर रोक लगा दिया गया था। वहीं दोपहर से ही देर शाम तक बिजली कटी रही।

Please follow and like us:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *