महिला सशक्तीकरण व ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा मजबूत आधार

साहेबगंज,6अप्रैल। साहेबगंज के सुदूर गांव भोलिया टोला की पंचा देवी प्रधानमंत्री श्री नरेंद मोदी को देखने के लिए अपनी कुर्सी से बार-बार उठकर मंच की ओर जाती है द्यपंचा देवी प्रधानमंत्री को इस बात के लिए धन्यवाद कहना चाहती है कि उनके पहल से ही उसके घर की स्थिति आज मजबूत हुईई है ।
आज पंचा एक खुशहाल महिला उद्यमी है।पंचा का पूरा परिवार खुश है।उसकी बच्चियां स्कूल जा रही हैं। खुद पंचा ने भी अपना नाम लिखना सीख लिया है, बैंक खाता और मोबाइल फोन चलाने लगी है.. स्वाबलंबन की राह में वह आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही है।पर स्वाबलंबन और आत्म निर्भरता की राह को आसान बनाया उसकी कड़ी मेहनत और सखी मंडल से मिले भरपूर सहयोग ने। पंचा जैसी सैकड़ों महिलाएं आज सशक्त हैं और सखी मंडलों के सहयोग से गावों में खुशहाली, आत्म निर्भरता और सफलता की नई कहानी लिख अपने परिवार का भरण पोषण कर रही हैं।
पंचा कहती हैकि उसका जीवन अभावों में गुजर रहा था. परिवार को दो वक्त का भोजन भी नसीब नहीं होता था, पति हर दिन आर्थिक तंगी के कारण शराब पीने लगे थे लेकिन जब से मैंने सखी मंडल के साथ काम करना प्रारंभ किया मेरे घर में हर दिन चूल्हा जलने लगा।पंचा कहती हैकि उसे इस बात की ख़ुशी है कि प्रधानमंत्री आज 1 लाख सखी मंडलों के बीच मोबाइल फोन का वितरण करेंगे.. जिसके जरिए सखी मंडलों के सदस्य नकद रहित भुगतान समेत डिजिटल भारत और डिजिटल झारखण्ड की मुहिम को आगे बढ़ायेंगी।
वर्ष 2011 में झारखण्ड राज्य आजीविका प्रोत्साहन सोसाइटी के गठन के साथ ही सखी मंडलों और ग्राम संगठनों के संचालन से शुरू हुई मुहिम आज राज्य में आन्दोलन का रूप ले चुका है. यह आन्दोलन महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सामूहिक रोजगार के माध्यम से सशक्त कर नई मिसाल पेश कर रहा है.।
महिलाओं को ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक, आर्थिक परिवर्तन का वाहक बनाने की जो शुरुआत झारखण्ड सरकार ने 2012-13 में राज्य के तीन जिलों दृ पाकुड़, पश्चिमी सिंहभूम और रांची के आठ प्रखंडों में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रारंभ की उसके बेहतर परिणाम सामने आने लगे हैं.।सरकार की योजना है कि राज्य के सभी 32 हजार गांवों को 2.11 लाख सखी मंडलों के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता प्रदान की जाय। सखी मंडल 10 से 20 महिलाओं का समूह है. एक टोला में रहने और एक जैसे सामाजिक, आर्थिक समस्याओं का सामना करने वाली गरीब महिलायें एक निश्चित लक्ष्य (गरीबी हटाना) पाने के लिए कुछ नियमों का पालन करते हुए सखी मंडल का संचालन करती हैं. सखी मंडल के लिए समूह को प्रशिक्षित किया जाता है, सभी की सहमति से समूह का नाम रखा जाता है एवं समूह के नाम से नजदीकी बैंक शाखा में खाता खोला जाता है. सखी मंडल गरीबों की पहचान कर उन्हें संगठित कर उनकी क्षमता का विकास करती है. गरीब महिलाओं के लिए उचित आजीविका का चयन कर पूंजी उपलब्ध कराती है और सामाजिक समस्याओं से लड़ने की क्षमता को बढ़ा कर सुरक्षा कवच प्रदान करती है।

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