नक्सली घटनाओं में कमी आयी,आत्मसमर्पण करने वालों की संख्या बढ़ीःसीएम

रांची,8मई। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि उनके नेतृत्व में राज्य में सरकार गठन के बाद झारखंड में नक्सली वारदात की घटनाओं में कमी आयी है और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की संख्या में वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री ने नक्सल समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार से विशेष सहयोग की अपेक्षा करते हुए करते हुए कहा कि अफीम की खेती में खतरनाक वृद्धि को देखते हुए रांची में मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो (एन0सी0बी0) के पूर्ण विकसित विभाग और नक्सलियों की सम्पति की जप्ती को सुविधाजनक बनाने के लिए राँची में प्रवर्त्तन निदेशालय की स्थापना की जाए। मुख्यमंत्री आज नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री की अध्यक्षता में वामपंथ उग्रवाद से प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद झारखंड को बिहार से बंटवारे के बाद विरासत में प्राप्त हुआ, लेकिन हाल के वर्षां में नक्सली घटनाओं पर कमी आयी है। उन्होंने बताया कि आकर्षक आत्मसमर्पण नीति बनायी गयी,जिसके तहत पिछले दो वर्षां में 81नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया गया, वहीं इस दौरान कई सफल मुठभेड़ में विभिन्न शीर्ष उग्रवादी मारे गये। राज्य सरकार ने इनामी नक्सलियों की संख्या 100 से बढ़ाकर 200 किया और पुरस्कार राशि की अधिकतम सीमा एक करोड़ तक कर दी गयी। इसके अलावा घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए पूर्व में चल रहे दो एक्शन प्लान-सारंड तथा सरयू एक्शन प्लान के
मुख्यमंत्री ने बताया कि सार्थक एवं कारगर अभियान के फलस्वरुप झारखण्ड में नक्सलियों के जनाधार में काफी कमी आयी है। वर्ष 2001-14 के बीच जहाँ नक्सली घटनाओं की औसत संख्या प्रतिवर्ष करीब 400 थीं, वहीं वर्ष 2015 एवं वर्ष 2016 में यह औसतन 200 से भी कम हुयी है।वहीं वर्ष 2001-14 की बीच नक्सल हमलों एवं मुठभेड़ में शहीद होने वाले पुलिसकर्मी की औसत संख्या प्रतिवर्ष 35 एवं मृतक आम नगरिकों की संख्या 115 रही, जो दो वर्षो में घटकर क्रमशः 05 एवं 50 के करीब है। जबकि पहले नक्सलियों द्वारा पुलिस हथियार लूटे जाने की औसत संख्या 39 रही, जबकि विगत दो वर्षो में यह संख्या शून्य हो गयी है। वर्ष 2001-14 तक राज्य में 70 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया था, जबकि वर्ष 2015 से अब तक 65 उग्रवादी अबतक समर्पण कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी मांग की वामपंथी नक्सलियों से प्रभावित जिलों में आईएपी योजना की पुनर्स्थापना की जाए और नक्सल विरोधी अभियान के लिए प्रतिनियुक्त केन्द्रीय सुरक्षा बलों के द्वारा जो राशि की मांग की गई है, उसे राज्य की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुये माफ किया जाय, क्योंकि नक्सलवाद एक राष्ट्रीय समस्या है। उन्होंने नक्सल विरोधी अभियानों के लिए पुलिस हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल के लिए एस0आर0ई0 के तहत् प्रतिपूर्ति और रांची में एक हवाई निगरानी इकाई की स्थापना का भी सुझाव दिया। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने झारखण्ड के जिलों में विशेष बल के लिए एस0आई0एस0 योजना के तहत बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए सहयोग मांगा और अफीम की खेती में खतरनाक वृद्धि को देखते हुए मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो (एन0सी0बी0) के पूर्ण विकसित विभाग की स्थापना का आग्रह किया। उन्होंने नक्सलियों की सम्पति की जप्ती को सुविधाजनक बनाने के लिए राँची में प्रवर्त्तन निदेशालय की स्थापना की भी मांग की।

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