एचईसी अधिगृहित भूमि की बिक्री से प्राप्त रकम को रैयतों को वापस करें-बाबूलाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा पत्र
रांची,22अक्टूबर। झारखंड विकास मोर्चा प्रमुख बाबूलाल मरांडी ने एचईसी प्रबंधन से मांग की है कि वह अधिगृहित भूमि की बिक्री से प्राप्त रकम को मूल रैयतों को वापस करें। इस संबंध में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आवश्यक हस्तक्षेप का आग्रह किया है।
बाबूलाल मरांडी ने बताया कि रांची में अवस्थित एच0ई0सी0 के लिए वर्ष 1955-59 के अंतराल में अधिग्रहित भूमि वŸार्मान में एच0ई0सी0 द्वारा अनुपयोगी जमीन सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थान को बेचे जाने की ओर आकृष्ट कराते हुए कहा कि एचईसी के लिए वर्ष 1955 से 1959 के अंतराल में 7886 एकड़ जमीन अधिगृहित की गई थी। जिसके लिए रैयतों को मुआवजा के तौर पर मात्र 1300-3500 रुपये प्रति एकड़ भुगतान किया गया था जो बहुत ही कम था एवं विस्थापित होने वाले रैयतों में से कुछ रैयतों को एच0ई0सी0 में नौकरी देकर पुर्नवास किया गया लेकिन अभी भी बहुत से विस्थापित रैयत नौकरी एवं पुर्नवास के लिए आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कंपनी प्रबंधन द्वारा अनुपयोगी जमीन बेचने से प्राप्त राश्शि का उपयोग एच0ई0सी0 में हो रहे नुकसान को पाटने एवं सेवानिवृत कर्मचारियों को सेवानिवृति लाभ के तौर पर देने में किया गया। उन्होंने बताया कि एच0ई0सी0 ने इस राश्शि का कुछ भी हिस्सा विस्थापित परिवारों के पूर्नवास पर खर्च नहीं किया और न ही मुआवजा के तौर पर क्षतिपूर्ति राश्शि दी गयी। अभी हाल में ही एच0ई0सी0 द्वारा 675 एकड़ जमीन स्मार्ट सिटी निर्माण के लिए झारखंड सरकार को देने की तैयारी हो रही है जिसके एवज में राज्य सरकार द्वारा एच0ई0सी0 को 743 करोड़ रुपया मिलेगा। जहां तक उन्हें जानकारी है, इस राश्शि का उपयोग भी एच0ई0सी0 अपने बकायों को पाटने एवं कर्मचारियों का बकाया राश्शि देने में खर्च करेगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार, एच0ई0सी0 से खरीदी गई 675 एकड़ जमीन पर बड़े-बड़े रियल इस्टेट कंपनियों को उंची दर पर निविदा आमंत्रित कर बड़े-बड़े हाउसिंग कॉम्पलेक्स, डुप्लेक्स, मॉल, कामर्शियल कॉम्पलेक्स इत्यादि बनाकर उंची कीमत पर बाजार में बेचेगी। इससे करोड़ों का लाभ होगा लेकिन इस लाभांश्श का कुछ भी हिस्सा मूल रैयतों को नहीं मिलने वाला है। उन्होंने विस्थापित रैयतों की हित को ध्यान में रखते हुए यह मांग की है कि एच0ई0सी0 को बिक्र्री भूमि से मिलने वाली राश्शि का 80 प्रतिशत विस्थापित रैयतों को मुआवजा के तौर पर क्षतिपूर्ति मिलनी चाहिए। बाबूलाल मरांडी ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रशासनिक निर्णय लेते हुए संबंधित मंत्रालय एवं राज्य सरकार को निर्देश्शित करने का आग्रह किया गया है।

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