नक्सलियों के लैंड माइंस की चपेट में आये हाथी को बचाने की कोशिश

रांची,14जनवरी। पलामू रिजर्व क्षेत्र में नक्सलियों द्वारा बिछाये गये लैंड माइंस की चपेट में आये हाथी को बचाने के प्रयास में वन विभाग और वाइल्ड लाइफ की टीम जुट गयी है। हालांकि विस्फोट में घायल हाथी का पता नहीं चल पाया है, लेकिन वन विभाग की टीम लगातार घायल हाथी की तलाश में जुटी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 9जनवरी की रात को जंगली हाथियों के झुंड से बिछड़ा एक हाथी नक्सलियों द्वारा बिछाये गये बारुदी सुरंग विस्फोट में घायल हो गया। बताया गया है कि घायल हाथी को कंट्रोल में करने वाली ट्रेकुलाइजर एक्सपर्ट को काफी परेशानी उठानी पड़ सकती है,क्योंकि घायल हाथी अपने आसपास किसी को आते देख कर गुस्सा हो सकता है। इसलिए हाथी को ट्रैंकुलाइज (बेहोश कर पकड़ना) करने का आदेश दिया गया है, उसके बाद ही घायल हाथी का इलाज हो पाएगा।
बताया गया है कि घायल हाथी जिस क्षेत्र में है, उस संबंध में वन विभाग को जानकारी मिल चुकी है, लेकिन अभी उस पर कंट्रोल नहीं किया जा सका है। अभियान से जुड़े वाइल्ड लाइफ के डॉक्टर अजय कुमार ने कहा कि हाथियो में प्राकतिक गुण होता है जिससे उसके घाव धीरे- धीरे भर जाएगा। इस अभियान में डाइरेक्टर एम. पी सिंह, रेंजर भोला सिंह, राजेंद्र शुक्ला, एसीएफ मदनजीत सिंह, वनकर्मी, गार्ड और ट्रेकर लगे हुए हैं।
घायल हाथी के रेस्क्यू में शामिल पलामू टाइगर रिजव के डाइरेक्टर एम पी सिंह ने कहा कि वन विभाग ने लैंड माइंस हटाने और अन्य मामलों में पुलिस से मदद मांगी है। कई बार विभागीय पत्राचार भी किया गया है, पर हमें अपेक्षाकृत मदद नही मिल पा रहा है, पुलिस नक्सली संघर्ष से वाइल्ड एरिया के जंगल से जानवर काफी बैचेन है। उनके हाव भाव मे काफी परिवर्तन दिख रहा है। नक्सलियो के बिछाये लैंड माइंस से पिछले बार भी एक हाथी की मौत हो गयी थी, वर्ष 2013 व 2017 मे भी हाथियो को गोली लगी थी। इसके साथ कई बार अन्य जानवरों की मौत लगातार हो रही है।

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