विपक्षी नेता राज्यपाल से मिलें

 सीएस व डीजीपी के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग
रांची,16जनवरी। पूर्व मुख्यमंत्री और झाविमो के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में विपक्षी दलों के कई विधायक और वरिष्ठ नेताओं के एक शिष्टमंडल ने मंगलवार शाम राजभवन जाकर राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। संपूर्ण विपक्ष की ओर से राज्यपाल को सौंपे गये एक ज्ञापन में मुख्य सचिव राजबाला वर्मा और पुलिस महानिदेशक डी0के0पांडेय तथा अपर पुलिस महानिदेशक अनुराग गुप्ता के खिलाफ लगे आरोपों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की।
राज्यपाल को सौंपे गये ज्ञापन में
बताया गया है कि इन तीनों पदाधिकारियों पर पहले से ही भ्रष्टाचार और अपने पद के दुरुपयोग के कई गंभीर आरोप है और अब ये आरोप प्रमाणिकता के साथ सार्वजनिक भी हो चुके है। विपक्षी दलों ने राज्यपाल को बताया कि मुख्य सचिव राजबाला वर्मा 20 अप्रैल 1990 से लेकर 30दिसंबर 1991 के बीच चाईबासा उपायुक्त के रुप में कार्यरत थी, इनके उपायुक्त रहते हुए चाईबासा कोषागार से अधिक निकासी पर चारा घोटाले मामले में जांच एजेंसी ने इसके लिए इन्हें भी उत्तरदायी माना है और कार्मिक विभाग की ओर से राजबाला वर्मा से अब तक 22 बार स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन वर्षां तक स्पष्टीकरण का जवाब देना भी राजबाला वर्मा ने उचित नहीं समझा। वहीं पुलिस महानिदेशक डी0के0पांडेय 8 जून 2015 को हुए बकोरिया फर्जी मुठभेड़ के मुख्य सूत्रधार हैं, जिसमें 12 निर्दाष गरीब लोगों को नक्सली के रुप में पहचान कर उनकी हत्या कर दी गयी और डीके पांडेय ने अपनी झूठी वाहवाही के लिए अपने मताहत कनीय अधिकारियों को निर्देशित कर इस घटना को मूर्त रुप दिया था। इस घटना की जांच कररहे सीआईडी के एडीजी एमवी राव के बयानों से सच्चाई अब सार्वजनिक पटल पर आ गयी है और डीजीपी डीके पांडेय इन सारे आरोपों के संदेह के घेरे में है, लेकिन सरकार इस मामले को रफा-दफा कर डीजीपी को बचाने के प्रयास में जुटी है।
एडीजी अनुराग गुप्ता पर भी राज्यसभा चुनाव जून 2016 में सत्ताधारी दल के प्रत्याशी के पक्ष में काम करने और पद का दुरुपयोग करने का आरोप है और इन आरोपों के विरुद्ध चुनाव आयोग ने संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को निर्देशित किया है कि इन पर आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाए,लेकिन सरकार ने चुनाव आयोग के निर्देशों को ठेंगा दिखाते हुए इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया है। विपक्षी दलों ने राज्यपाल से आग्रह किया कि इन तीनों पदाधिकारियों पर लगे गंभीर आरोपों की जांच सीबीआर्ठ से कराने के लिए सरकार को निर्देश दिया जाए।
राज्यपाल से मिलने वालों में कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम, झारखंड मुक्ति मोर्चा विधायक कुणाल षाड़ंगी, योगेंद्र प्रताप सिंह, झारखंड विकास मोर्चा विधायक प्रदीप यादव, पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजीव रंजन, राजेश ठाकुर, रवींद्र सिंह, झाविमो के सरोज सिंह, तौहिद आलम शामिल थे।

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