व्यवस्था को स्वतः स्फूर्त चलाने के लिए कमी को दूर करनी होगीः स्पीकर

सभा वेश्म बढ़ती अव्यवस्था की प्रवृति के निराकरण विषय पर कार्यशाला
रांची,16जनवरी। झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष दिनेश उरांव ने कहा है कि व्यवस्था को स्वतः स्फूर्त चलाने के लिए कमी को दूर करनी होगी। वे आज रांची में विधायी शोध संदर्भ एवं प्रशिक्षण कोषांग द्वारा “सभा वेश्म में आये दिन बढ़ती अव्यवस्था की प्रवृति के निराकरण एवं निदान“ विषय पर आयोजित एकदिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव ने कहा कि हर क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गयी है, एकीकृत बिहार विधानसभा में यदि कोई सदस्य अपनी बातों और समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराते थे, तो उसके निदान के प्रति संवेदनशीलता के साथ तुरंत कार्रवाई होती थी और संबंधित विभाग के पास अनुशंसा कर दी जाती थी। उन्होंने कहा कि आज सदन की कार्यवाही सुचारु रुप से नहीं चल पा रही है, पक्ष-विपक्ष के सदस्यों को सदन को सुचारु रुप से चलाने में सहयोग करना होगा और सदन सिर्फ गंभीर ही नहीं बनी रहे, चर्चा के कारण वातावरण को हल्का करने के लिए यदि कोई मर्यादित टिप्पणी भी होती है, तो यह वातावरण को सहज बनाने में सफलता मिलती है।
इससे पहले झारखंड विधानसभा के प्रथम विधानसभा अध्यक्ष रहे इंदर सिंह नामधारी ने कहा कि प्राचीन काल में राजाशाही परंपरा के दौरान द्वारा सभाएं होती थी, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभा के सदस्य जनता के बीच से सीधे चुन कर जाते है, इसलिए पहले और आज के सभासद में काफी अंतर है। उन्होंने कहा कि आज लोकतांत्रिक व्यवस्था में भी सदन के अंदर अव्यवस्था का माहौल है, ऐसे में स्पीकर को सूर्य की किरण की तरह कोई भेदभाव नहीं करना चाहिए, जिस तरह से सूर्य की किरण सबके लिए सामान होती है, वैसे ही स्पीकर की भी नजर सभा में मौजूद प्रत्येक सदस्य पर सामान रुप से रुप से होनी चाहिए। इंदर सिंह नामधारी ने कहा कि पूर्व में भी कई उदाहरण आये है, जब झारखंड जैसे छोटे राज्यों के लिए साल में 50 दिनों का सत्र आहूत करने की सिफारिशें की गयी है, लेकिन इस तरह की सिफारिशें देशभर के किसी भी विधानसभाओं में लागू नहीं हो पा रही है।
संसदीय कार्यमंत्री सरयू राय ने अपने संबोधन में कहा कि सभा वेश्म में अव्यवस्था को कुछ वक्ताओं ने उचित ठहराने की कोशिश की, तो कुछ ने इसे अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता यदि स्वच्छंदता में बदल जाती है, यहां तक ठीक है, लेकिन यह स्वच्छंदता अगर उश्रृंखलता बन जाएगी, तो यह ठीक नहीं होगा। उन्होंने बताया कि विपक्षी सदस्य को मर्यादित ढंग से अपनी बातें रखनी चाहिए, और उन्हें लगता है कि सरकार ठीक नहीं कर रही है, तो जनता का दरवाजा खुला है। उन्होंने यह भी कहा कि सत्तापक्ष को भी आलोचना सुननी की शक्ति होनी चाहिए।
सत्तारुढ़ दल के मुख्य सचेतक राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि सदन के कमजोर होने से लोकतांत्रिक प्रणाली भी कमजोर होगी और विधायिका के प्रति कार्यपालिका के उत्तरदायित्व में भी कमी आती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में यह प्रावधान किया गया है कि कोई सदस्य यदि सदन की कार्यवाही के दौरान वेल में आ जाता है, तो उसे उस दिन के लिए निलंबित समझा जाएगा। राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि अलग झारखंड राज्य में 289 विधेयक आये, लेकिन इसमें से ज्यादातर विधेयकों में विपक्ष की ओर से कोई संशोधन नहीं आया। उन्होंने वर्ष भर में चलने वाले सदन के कार्य दिवस में कमी आने पर भी चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि वर्ष 2000 से 2005 तक 119 दिनों तक सत्र आहूत किये गये, वर्ष 2005-09 के बीच 117 दिन, वर्ष 2010-2014 के बीच 105 दिन और वर्ष 2015-17 के बीच 92 दिनों के लिए सत्र आहूत किया गया।
झारखंड विकास मोर्चा विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि जब सदन के नेता के वाक्य ही फिसलने लगे, तो सदस्यों को फिसलने से कौन रोकेगा। उन्होंने कहा कि आज कार्यपालिका के उच्चस्थ पदों पर बैठे लोगों पर कई गंभीर आरोप है,ऐसे में यदि विधायक चुप रहेंगे, तो आने वाले समय में जनता से उन्हें ही पत्थर खाना होगा। वेल में आने वाले सदस्यों का वेतन काटने के सुझाव पर प्रदीप यादव ने कहा कि यदि सदस्यों को अपनी बात रखने के लिए वेतन भी कटवाना पड़े, तो इसके लिए वे एक दिन नहीं पांच महीने का वेतन कटवाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि सरकार आज रात में आरोपों से घिरे उच्चपदस्थ अधिकारियों को हटाये, कल से सदन सुचारु रुप से चलेगी, लेकिन ऐसा नहीं होने पर विपक्ष के सदस्यों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता है।
पùश्री और वरिष्ठ पत्रकार बलबीर दत्त ने कहा कि सभा वेश्म में अव्यवस्था को दूर करने में मीडिया की बड़ी भूमिका हो सकती है। उन्होंने कहा कि मीडिया को सदन में अव्यवस्था को नजरअंदाज करना चाहिए या ऐसी घटनाओं को हतोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने नये विधायकों के लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता पर भी बल दिया।
रांची विश्वविद्य्नालय के कुलपति प्रो. रमेश कुमार पांडेय ने कहा कि किसी की बात से सहमत हो या नहीं, दूसरी की बात को सुनने की शक्ति ईश्वर सभी सदस्यों को प्रदान करें। उन्होंने कहा कि विचारों का आदान-प्रदान होता है, तो रास्ते निकलते है। उन्होंने रांची विश्वविद्य्नालय में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा के 9 स्वतंत्र विभाग और विदेशी भाषा की पढ़ाई की व्यवस्था सुनिÜचत कराने में पक्ष-विपक्ष के सभी सदस्यों से सहयोग की अपील की।
विधायकों के लिए आहूत इस कार्यशाला में डेढ़ दर्जन से भी कम सदस्य पहुंचे, कार्यशाला में पहुंचने वाले विधायकों में मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी एकमात्र मंत्री थे, वहीं सत्तारुढ़ भाजपा की ओर से फूलचंद मंडल, मेनका सरदार, विमला प्रधान, अनंत ओझा, विरंची नारायण, शिवशंकर उरांव, अमित मंडल, नवीन जायसवाल, जीतू चरण राम, हरेकृष्ण सिंह, कांग्रेस की निर्मला देवी और झामुमो के कुणाल षाड़ंगी शामिल है।

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