वर्ष 2018-19 में मछली उत्पादन में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य

रांची,13फरवरी। राज्य सरकार ने वर्ष 2018-19 में मछली उत्पादन में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य निर्धारित किया है। राज्य में अभी मछली की मांग 2 लाख मीट्रिक टन सालाना है, जबकि राज्य में उत्पादन 1.45लाख मीट्रिक टन ही उत्पादन हो रहा है, करीब 55हजार मीट्रिक टन अब भी आंध्र प्रदेश और पिÜचम बंगाल से आयात करना पड़ रहा है।
कृषि,पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग द्वारा मछली उत्पादन में आत्मनिर्भरता को लेकर कई योजनाएं बनायी गयी है,ताकि आगामी वित्तीय वर्ष से राज्य में स्वयं ही ही मांग के अनुरुप 2 लाख मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन हो सके और अगले वर्ष से मछली का आयात पूरी तरह से बंद हो जाएगा। बताया गया है कि 1.16लाख निजी तालाबों के करीब 50हजार हेक्टयर और 16719सरकारी तालाबों में करीब 15हजार हेक्टयर क्षेत्र में मछली उत्पादन हो रहा है। वहीं 401 अन्य जलाशयों और कोल पिट्स एवं खान, नदियां, मनरेगा कूप, डोभा में भी मछली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
अलग राज्य गठन के वक्त राज्य में मात्र 14हजार मीट्रिक टन प्रति वर्ष मछली उत्पादन होता है, जो बढ़कर 1.45लाख मीट्रिक टन पहुंच गया है और इस वर्ष 2 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। मछली उत्पादन में बढ़ोत्तरी के लिए चालू वर्ष में अब तक 1050.89 करोड़ मत्स्य बीज का उत्पदन एवं संचयन, नदियों एवं जलाशयों में किया गया, वहीं मत्स्य प्रचार, अनुसंधान प्रशिक्षण, मत्स्य रियरिंग तालाब का निर्माण, मत्स्य विपणन योजना, मत्स्य बीज हैचरी अधिष्ठापन योजना समेत कई कार्यक्रम चलाये जा रहे है।

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