पत्थलगड़ी के विकराल रूप धारण करने की आशंका

खूंटी के आधा दर्जन गांवों में पत्थलगड़ी
रांची,25फरवरी। झारखंड में खूंटी जिले के अड़की और कई अन्य इलाकों में पत्थलगड़ी की बात इन दिनों चर्चा का विषय हैं। प्रतिदिन किसी न किसी गांव में पत्थलगड़ी की खबरें सामने आ रही हैं। रविवार को भी अड़की प्रखंड के कोचांग, बांबा, सेंजरी, साके, तुसंगा और तोरकोटा गांव में पत्थलगड़ी की जा रही है। यदि इससे समय रहते समुचित तरीके से नहीं निपटा गया, तो आने वाले समय में यह विकराल रूप धारण सकता है।
आधारभूत सुविधाओं के अभाव के कारण आक्रोश
राजधानी रांची से करीब 100 किमी दूर खूंटी जिले के घने जंगलों के बीच स्थित इस कोचांग बांबा, सेंजरी, साके, तुसंगा और तोरकोटा गांव में सरकारी योजनाओं की झलक तो दिखती है लेकिन सड़कों की स्थिति जरुर चितांजनक है। ग्रामसभा अब अपना अधिकार चाहती है और इसको लेकर पत्थलगड़ी का एलान किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के करीब सात दशक बीत जाने के बावजूद क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है, इसलिए अपने हक-अधिकार की बात कर रहे है। इलाके के विभिन्न गांवों का भ्रमण करने के दौरान यह साफ नजर आया कि ग्रामीण पत्थलगड़ी को लेकर उत्साहित है, जगह-जगह आम के पत्ते से तोरण द्वार बना कर और पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुरूप पत्थलगड़ी कार्यक्रम को अंजाम दिया जा रहा है।
बाहरी तत्वों की ओर से ग्रामीणों को दिग्भ्रमित करने की आशंका
खूंटी में पिछले कुछ दिनों में पुलिस और ग्रामीणों के बीच तनाव की कई खबरें सामने आई। यहां तक की प्रशासनिक अमले को बंधक तक बनाया गया। जमीनी हकीकत जानने के दौरान हमने इस पर जिले के पुलिस अधीक्षक अश्विनी कुमार सिन्हा से बात की। उन्होंने कहा कि पत्थलगड़ी एक आदिवासी परंपरा है, इसे वंशावली या गांव, क्षेत्र की सीमा बताने के लिए वर्षां से किया जा रहा है, लेकिन हाल के दिनों में कुछ बाहरी तत्व अपने निजी स्वार्थां की पूर्ति को लेकर पत्थलगड़ी की गलत तरीके से व्याख्या कर ग्रामीणों को दिग्भ्रमित करने का प्रयास कर रहे है, इसलिए सामाजिक-राजनीतिक समस्या है, इसे सिर्फ कानून-व्यवस्था का मसला नहीं समझा जाना चाहिए। इसके बावजूद झारखंड पुलिसिंग के माध्यम से ग्रामीणों को समझाने और उन्हें विश्वास में लेने की कोशिश की जा रही है। अश्विनी कुमार सिन्हा ने इस बात से इनकार नहीं किया कि नक्सली भी इस तरह की घटना को बढ़ावा देने में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में नक्सल प्रभाव खत्म हुआ है, उन इलाके में एक नाकारात्मक शक्तियां काम कर रही है, ऐसी शक्तियों से निपटने के लिए इलाके में सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम चलाये जाने की जरूरत है।
ग्राम सभादेश में प्रमाण पत्र निर्गत करने व सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं लेने की बात
सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में पत्थलगड़ी के पहले इसकी औपचारिक सूचना स्थानीय प्रशासन को भी स्पीड पोस्ट भेज कर दी जाती है। विभिन्न ग्राम पंचायतों द्वारा स्थानीय प्रखंड विकास पदाधिकारी को भेजे गये पत्र को ग्राम सभादेश का नाम दिया जाता है। जिसमें बताया जाता है कि संबंधित ग्राम सभा जाति, आवासीय, आय, आचरण, जन्म एवं मृत्यु समेत सभी प्रकार के प्रमाण पत्रों को निर्गत करेगी। ग्राम सभादेश में केंद्र सरकार, राज्य सरकार व उच्चतम न्यायालय के आदेश का अनुपालन करने, सीएनटी-एसपीटी एक्ट में सभी संशोधन को रद्द करने, भूमि अधिग्रहण को रद्द करने, भारत के संविधान में शुरू से अब तक किये गये सभी संशोधनों को रद्द करने की मांग की है, तब तक राष्ट्रीय त्योहारों में भाग नहीं लेने, लोकसभा, विधानसभा व पंचायत चुनाव प्रक्रियाओं में मतदान नहीं करने, सरकार व गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा चलायी जा रही योजनाओं को स्वीकार नहीं करने की बात कही जा रही है।

अधिकारियों को नौकर, कर्मचारियों को कुली-मजदूर कह कर संबोधन, दुर्व्यवहार
ग्रामसभा द्वारा स्थानीय प्रशासन को भेजे गये कई पत्रों में अधिकारियों को नौकर कह कर संबोधित किया जा रहा है, वहीं कर्मचारियों को कुली-मजदूर कह कर संबोधित किया जाता है। वहीं ग्राम सभादेश में पत्र को जो नंबर दिया जाता है, वह भी काफी अजीत रहता है, इसमें उपायुक्त, प्रखंड विकास पदाधिकारी समेत अन्य अधिकारियों के नाम के आगे ओ.आई.जी.एस. लिखा जाता है, इस संबंध में सरकारी अधिकारियों से पूछे जाने पर इसका सही अर्थ बताने में असमर्थता जाहिर करते है, वहीं यह अनुमान लगाया जाता है कि ग्राम सभादेश में ओ.आई.जी.एस. का अर्थ -ऑर्गनेजाईशन ऑफ गवमेंट ऑफ इंडिया सर्विस।
सीएम ने सख्ती से निपटने का दिया संकेत
गांव में विकास की किरण पहुंचनी चाहिए इससे इनकार नहीं किया जा सकता लेकिन संविधान की ब्याख्या अपने तरीके से हो यह कतई सही भी नहीं ढहराया जा सकता। मुख्यमंत्री भी इसको लेकर काफी गंभीर हैं और उन्हें लगता है कि कुछ राष्ट्रद्रोही तत्व इसमें शामिल हैं जिनसे सख्ती से निपटा जाना चाहिए।
क्या है पत्थलगड़ी
पत्थलगड़ी में ग्रामसभा की ओर से गांव के प्रवेश द्वार पर एक बड़ा सा पत्थर गाड़ने की परंपरा है। इस पत्थर पर सबसे पहले ग्रामसभा का नाम लिखा होता है, उसके बाद सर्वशक्ति संपनन्नता पारंपरिक रूढ़ि प्रथा ग्रामसभाओं के विशेष कानूनी अधिकार का जिक्र होता है। पत्थर को हरे रंग से रंग कर ग्राम सभा की सशक्तिं के बारे में जानकारी दी जाती है। इस पत्थर में लिखा होता है कि संविधान के अनुच्छेद 244(1) अधीन देश के नौ राज्यों को पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आते है, जिसमें मानकी मुंडा, परगना, पड़हा, डोकलो सोहोर, हाजोरभूम के अधिकारियों के बारे में जानकारी दी जाती है। इसके अलावा स्वतंत्रता का अधिकार, अनुच्छेद 19 की धारा (5) (6) के तहत पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र में किसी भी बाहारी गैर रूढ़ि प्रथा व्यक्तियों के स्वतंत्र रूप से भ्रमण करने, बस जाने या घूमने-फिरने, कारोबार, व्यवसाय, रोजगार या नौकरी करने पर प्रतिबंध रहने की बात कही गयी है। पत्थलगड़ी के माध्यम से संविधान का हवाला देकर यह भी कहा जाता है कि गांव में अनुसूचित क्षेत्रों में लोकसभा या विधानसभा का कोई भी कानून लागू नहीं होता है।

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