चारा घोटाले के चौथे मामले में लालू प्रसाद दोषी करार

 जगन्नाथ मिश्र समेत 12 बरी, 19 दोषी करार, 21, 22 व 23 को सजा के बिन्दुओं पर सुनवाई
रांची,19मार्च। अरबों रुपये के बहुचर्चित चारा घोटाले में दुमका कोषागार से 3.76 करोड़ रुपये अवैध निकासी से जुड़े मामले में रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव समेत 19 आरोपियों को दोषी करार दिया है, जबकि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र समेत 12 आरोपियों को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया।
सीबीआई के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत ने दुमका कोषागार से 3.76 करोड़ रुपये के अवैध निकासी से जुड़े आरसी 38ए/96 मामले में आज फैसला सुनाते हुए लालू प्रसाद समेत 19 आरोपियों को भादवि की विभिन्न धाराओं और भ्रष्ट्रचार निरोधक कानून के तहत दोषी करार दिया। सीबीआई की अदालत ने लालू प्रसाद के अलावा  अजीत कुमार वर्मा, अरूण कुमार,  डॉ. विमलकांत दास, गोपीनाथ , डॉ. कृष्ण कुमार प्रसाद, मनोरंजन प्रासद,  महेंद्र सिंह बेदी, नंद किशोर प्रसाद, नरेश प्रसाद, ओपी दिवाकर, पंकज कुमार बोई, पिताम्बर झा, राधा मोहन मंडल, राज कुमार शर्मा, रघुनंदन प्रसाद, राजेंद्र कुमार बगेरिया, सत्येंद्र कुमार दास और फूलचंद मंडल को दोषी करार दिया। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र के अलावा धुर्व भगत, जगदीश शर्मा, आरके राणा, बेग जुलियस, महेश कुमार, विद्या सागर निषाद, अधीर चंद्र चौबे, वेणु झा, लाल मोहन प्रसाद, निहालचंद्र सुवर्णा और सरस्वती चंद्रा को बरी कर दिया गया।
अदालत ने सजा के बिन्दुओं पर सुनवाई की तिथि 21, 22 व 23 मार्च निर्धारित की है।
सीबीआई के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत ने 5 मार्च को सुनवाई के बाद 15 मार्च को फैसला सुनाए जाने की तिथि निर्धारित की थी, लेकिन इस बीच लालू प्रसाद के अधिवक्ता की ओर से महालेखाकार समेत तीन अधिकारियों को भी आरोपी बनाने को लेकर याचिका दायर की, जिसके कारण 15 को सुनवाई नहीं हो पायी और 16 अदालत ने इस मामले का निष्पादन किया, जबकि 17 मार्च को शिवपाल सिंह समेत अन्य न्यायिक अधिकारी दो दिवसीय प्रशिक्षण के लिए न्यायिक अकादमी चले गये, जिसके कारण 17 को भी सुनवाई नहीं हो पायी और फैसले के लिए 19 मार्च की तिथि निर्धारित की गयी।
दुमका कोषागार से अवैध निकासी से जुड़े इस मामले में  दिसंबर 1995 से जनवरी 1996 के 49 आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। इस मामले में करीब 22 वर्षों तक सीबीआई की अदालत में सुनवाई के दौरान 49 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर कर लगभग 200 गवाहों को पेश किया गया । 49 आरोपियों में 3 सरकारी गवाह बन गए जिनमें एक की मौत हो गई एक आरोपी दुमका के तत्कालीन आयुक्त एस एन दुबे पर लगे आरोप ऊपरी अदालत से निराश हो गए ट्रायल के दौरान 14 आरोपियों की मौत हो गई ।
Please follow and like us:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *