केंद्रीय शिक्षा सचिव ने शिक्षा में सुधार के लिए झारखंड की सराहना की

सीएम से मुलाकात की
रांची,14जून। केंद्रीय शिक्षा सचिव अनिल स्वरुप ने आज रांची के प्रोजेक्ट भवन स्थित झारखंड मंत्रालय में मुख्यमंत्री रघुवर दास से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान राज्य में शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर चर्चा हु । मुख्यमंत्री ने कहा कि हर हाल में शिक्षित झारखंड बनाना है।
बाद में पत्रकारों से बातचीत में शिक्षा सचिव अनिल स्वरुप ने कहा कि दो-ढ़ाई साल में उठाये गये कदम से झारखंड में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आया है। उन्होंने बताया कि शिक्षा के क्षेत्रम ें सुधारात्मक कदम का परिणाम तुरंत नजर नहीं आता और इसे सिर्फ मैट्रिक और इंटर की परीक्षा परिणाम से जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि परीक्षा परिणाम तो पूर्व की शैक्षणिक व्यवस्था का प्रतिफल होता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल साक्षरता समेत अन्य दिशा में जो कदम उठाये गये है । इसका आने वाले समय में सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेगा।
झारखंड सरकार की ओर से राज्य में बनने वाले तीन नये विश्वविद्य्नालयों के लिए आधारभूत संरचना में सहयोग और प्राथमिक एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किये जा रहे अन्य कार्यां से अवगत कराया गया। साथ ही शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए उठाये गये कदम, शिक्षकों की नियुक्ति समेत अन्य मुद्दों के बारे में जानकारी दी गयी।
इधर, मुख्यमंत्री रघुवर दास 16 जून को दो दिवसीय दौरे पर दिल्ली जाएंगे। बताया गया है कि मुख्यमंत्री 16 जून को दिल्ली जाएंगे और क केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करेंगे, जबकि मुख्यमंत्री 17 जून को न दिल्ली में नीति आयोग की होने वाली बैठक में भी हिस्सा लेंगे।
गौरतलब है कि झारखंड में इस वर्ष मैट्रिक और इंटर साइंस व कॉमर्स का परिणाम पिछलेवर्ष की तुलना में खराब हुआ है। राज्य की शिक्षामंत्री डॉ. नीरा यादव ने भी इसमें सुधार को लेकर जैक अध्यक्ष और विभाग के सचिव के साथ बैठक की। शिक्षामंत्री मंत्री डॉक्टर नीरा यादव ने कहा है कि मैट्रिक और इंटर के रिजल्ट की समीक्षा होगी। शिक्षामंत्री ने जैक अध्यक्ष डॉ0 अरविंद प्रसाद सिंह और सचिव रजनीकांत वर्मा के साथ बैठक कर रिजल्ट खराब होने के कारणों की जानकारी ली। खराब रिजल्ट के कारणों को लेकर बताया कि इस वर्ष सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में परीक्षा होने से परीक्षार्थी थोड़े डर गये, वहीं राज्य के हा स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, इसके बावजूद प्रथम श्रेणी से पास करने वाले विऊनार्थियों की संख्या पहले की तुलना में अधिक है। शिक्षामंत्री ने कहा कि रिजल्ट के लिए शिक्षकों की जवाबदेही तय होगी।

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