खरीद-फरोख्त में संलिप्त सभी लोगों के कॉल डिटेल्स की जांच हो : झाविमो

रांची,11जुलाई। झारखंड विकास मोर्चा ने विधायकों के खरीद-फरोख्त से जुड़ें पत्र में उल्लेखित सभी 20 लोगों के कॉल डिटेल्स की जांच करने की मांग की है। झाविमो के केन्द्रीय प्रवक्ता योगेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि पत्र के अनुसार खरीद-फरोख्त में छह विधायक सहित कुल 20 नेता इस कुकृत्य में शामिल हैं। इसमें दो राज्य के मुख्यमंत्री तक भामिल हैं। झाविमो राज्य सरकार से मुख्यमंत्री सहित सभी लोगों के निजी मोबाईल नंबर, उनके पीए व उनके चालकों के मोबाईल नंबर का 01 जनवरी 2015 से लेकर 10 फरवरी 2015 की अवधि तक के मोबाईल कॉल डिटेल्स की जांच की मांग करती है। इससे ही भाजपा पूरी तरह बेपर्दा हो जाएगी। सवाल उठता है कि भाजपा आखिर सीबीआई जांच से डर क्यों रही है ? सरकार इसकी अनु ांसा कर दुध-का-दुध व पानी-का-पानी क्यों नहीं करती ? खुद जज बनकर पत्र को फर्जी करार देकर भाजपा केवल बयानबाजी कर रही है। अब सीबीआई जांच की अनु ांसा तो राज्य सरकार को ही न करनी है फिर किसका इंतजार किया जा रहा है। सभी संलिप्त भाजपाई जाकर सीएम से गुहार क्यों नहीं लगाते कि उनपर लगे दाग को सीबीआई जांच करवाकर धुलवाया जाय ? हालांकि बाबूलाल ने पहले ही कह दिया है कि भाजपा के दामन पर इतने दाग है कि दुनियां का कोई साबुन इसे नहीं धो सकता है।
झाविमो प्रवक्ता ने कहा कि जांच कराने की बजाय भाजपा केवल बयानबाजी कर व झाविमो अध्यक्ष पर फर्जी मुकदमा कर आईवॉश कर रही है। हास्यास्पद बात है कि विधायक भी थाना को दिए गए आवेदन में खुद ही भादवि की धारा तक अंकित कर दे रहे हैं। थानेदार का काम और कुछ आसान हो जाता अगर केस डायरी भी विधायक घर ले जाकर ही भर लेते। सत्ता के दुरुपयोग का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है कि एक बरामद पत्र का हवाला देकर जिन लोगों पर कार्रवाई के लिए राज्यपाल महोदया से मिला जाता है उन लोगों पर अभी तक कोई कार्रवाई तो हुई नहीं, उल्टा जांच की मांग करने वाले पर ही उन लोगों से राज्य सरकार के इ ारे पर फर्जी मुकदमा करा दिया गया। झाविमो अध्यक्ष पर फर्जी केस कराकर व गीदड़भभकी देकर भाजपा सोच रही है कि झाविमो इस मुद्दे पर चुप हो जाएगी तो वह मुगालते में है। पत्र की सत्यता की जांच तो सरकार को करानी ही होगी।

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