बदलते परिवेश में भी आदिवासियों की परंपरा कायम-राज्यपाल

विश्व आदिवासी दिवस पर एसटी सरकारी सेवक की ओर से कार्यक्रम आयोजित
रांची,9अगस्त। राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने विश्व आदिवासी दिवस समारोह के इतिहास पर प्रकाश डाले एवं कैसे इसे बेहतर तरीके से आज के परिपेक्ष्य में मनाया जाय। उन्होने कहा आज के बदलते हुए समय में जितने भी पुराने सभ्यता, संस्कृति एवं शिक्षा का आधुनिकीकरण हो रहा है तथा पुराने परम्पराओं को छोड़कर नये परिवेश में जीवनयापन किया जा रहा है परन्तु आदिवासियों ने अपने परम्परा को कायम रखा है। उन्होने कहा कि हड़िया आदिवासियों के देवताओं को अर्पित किया जाता है लेकिन इसे सिर्फ प्रसाद के रूप डाला करें न कि नशा के लिए उपयोग करें। उन्होने कहा कि विकास का लक्ष्य को योजना बना कर अंतिम व्यक्ति तक पहुॅचाया जाय सिर्फ विश्व आदिवासी दिवस के दिन समारोह आयोजित कर साल भर भुल जाने से विकास नहीं होगा। राज्यपाल ने कहा कि सरकार द्वारा आदिवासी दिवस का आयोजन नहीं करने पर भी उन्होने प्रकाश डाला। उन्होने कहा कि सरकारी सहायता के बिना ही इस आयोजन को झारखण्ड राज्य अनुसूचित जनजाति सरकारी सेवक संघ द्वारा किया जाना बहुत अच्छी बात है।वे झारखण्ड राज्य अनुसूचित जनजाति सरकारी सेवक संघ से ‘विश्व आदिवासी दिवस पर रांची समाहरणालय परिसर में आयोजित समारोह को संबोधित कर रही थी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष तुरतन लुगुन द्वारा किया गया। उन्होंने अपने स्वागत भाषण में विश्व आदिवासी दिवस के इतिहास एवं महत्ता पर प्रकाश डाला । इस मौके परबाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष आरती कुजूर द्वारा विश्व आदिवासी दिवस समारोह के औचित्य एवं इसे कैसे बेहतर किया जाय ताकि आदिवासियों का विकास किया जा सके तथा विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक कैसे पहुॅचे। धन्यवाद ज्ञापन संघ के उपाध्यक्ष विक्रम महली ने किया। समारोह में उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता, आईटीडीए निदेशक, एडीएम नक्सल, एडीएम विधि व्यवस्था, नजारत उप समाहर्ता इनके अलावे जिले के सभी पदाधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

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