पहाड़ी मंदिर में 5 मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में खुला दान पात्र, कई नोट सड़े मिलें

रांची,25सितंबर। झारखंड की राजधानी रांची स्थित प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर में मंगलवार को पांच मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में दान पेटी को खोला गया। महीनों से बंद पड़े दान पात्र के अंदर पानी घुस जाने से कई नोट सड़क चुके हैं।
राजधानी में धार्मिक और पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर में रखे दान पत्र को पांच मजिस्ट्रेट की टीम के सामने मंगलवार सुबह खोला गया। दान पात्र में काफी मात्रा में नोट सड़े मिले हैं। बताया गया है कि दान-पेटी को काफी दिनों से सील कर छोड़ दिया गया था, वहीं बारिश की छींटें पड़ने के कारण दानपेटी में पानी चले जाने के कारण कई नोट खराब हो गये है। सावन महीने में प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ पर जलाभिषेक के लिए पहाड़ी मंदिर पहुंच रहे थे और अपनी श्रद्धा तथा सामर्थ्य के अनुरुप दान पेटी में नोट और सिक्के डाल रहे थे। सील बंद दान पेटी के भर जाने के बावजूद उसे काफी दिनों तक नहीं खोला गया,जिसके कारण कई नोट सड़ गये।
रांची के उपायुक्त राय महिमापत रे के निर्देश पर 20 दानपात्र को खोला गया,जो नोट अच्छे बचे है और जो खराब हो चुके है, उनकी अलग-अलग गिनती की जा रही है। जिला प्रशासन की ओर से नोटों की गिनती के लिए पांच मजिस्ट्रेट के तौर पर कांके के सीआई चंचल किशोर प्रसाद, अरगोड़ा के सीआई कमलाकांत वर्मा, हेहल के सीआई दिलीप कुमार गुप्ता और मांडल के सीआई रमेश कुमार रविदास तथा ओरमांझी के सीआई रंजीत कुमार की उपस्थिति में दानपेटी को खोला गया है। वहीं कार्यपालक दंडाधिकारी एनी रिंकु कुजूर की उपस्थिति में नोटों की गिनती की वीडियोग्राफी भी करायी जा रही है।
बताया गया है कि पहाड़ी मंदिर के पुजारियों को कई महीने से वेतन नहीं मिला है और इनसभी ने उपायुक्त से मिलकर वेतन भुगतान का आग्रह किया था। पुजारियों का कहना है कि यदि समय रहते दान पेटी को खोल दिया जाता था, तो बड़ी राशि मंदिर के विकास में आ जाती, लेकिन मंदिर प्रबंधन समिति की उदासीनता की वजह से ऐसी स्थिति हो गयी।
गौरतलब है कि राजधानी रांची स्थित पहाड़ी मंदिर की पहचान न सिर्फ धार्मिक महत्ता के कारण है, बल्कि इसकी ऐतिहासिक पहचान भी रही है। अंग्रेजी शासन में इस पहाड़ी मंदिर पर कई स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी गयी थी और आजादी के बाद से प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त और 26 जनवरी को पहाड़ी मंदिर में राष्ट्रीय ध्वज भी फहराया जाता है। संभवतः यह राज्य का एक मात्र मंदिर है,जहां भगवा ध्वज के साथ राष्ट्रीय ध्वज भी फहराया जाता है। तत्कालीन रक्षामंत्री मनोहर पर्णिकर ने वर्ष 2015 में पहाड़ी मंदिर पर सबसे उंचे राष्ट्रीय ध्वज को भी फहराया था, लेकिन बाद में खराब मौसम की वजह से विशेष कपड़े से बना यह ध्वज ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पा रहा था,जिसके कारण उसे उतार लिया गया।

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