शहरी क्षेत्रों में अब दो वर्ष में होगा जमीन का मूल्य निर्धारण

रांची,25सितंबर। झारखंड के शहरी क्षेत्रों में प्रतिवर्ष की जगह दो वर्ष में भूमि का न्यूनतम मूल्य निर्धारित होगा। मुख्यमंत्री रघुवर दास की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी गयी।
बैठक समाप्त होने के बाद मंत्रिमंडलीय सचिवालय एवं समन्वय विभाग के प्रधान सचिव एसकेजी रहाटे ने बताया कि बिहार स्टांप (लिखत का न्यून मूल्यांकन निवारण) (अंगीकृत) नियमावली,1995, झारखंड मुद्रांक लिखत का न्यून मूल्यांकन नियमावली, 2009 एवं 2012 में संशोधन कर अब ग्रामीण क्षेत्रों की तरह शहरी क्षेत्रों में भी दो वर्ष के अंतराल में जमीन का न्यूनतम मूल्य निर्धारित करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि जिलों में उपायुक्त की अध्यक्षता में समिति विभिन्न क्षेत्रों के लिए जमीन के दर का निर्धारण करेगी और इस दर में दस प्रतिशत से अधिक बढ़ोत्तरी नहीं होगी।

विद्युत सबस्टेशन के लिए 32.92करोड़ विमुक्त
सिमडेगा ग्रिड सब-स्टेशन एवं संबंधित संचरण लाइन के निर्माण के लिए पूर्व में स्वीकृत मूल परियोजना राशि 90.77 करोड़ रुपए को बढ़ाकर प्रथम पुनरीक्षित परियोजना राशि 123.69 करोड़ रुपएकी प्रशासनिक स्वीकृति और वित्तीय वर्ष 2018-19 में बजट उपबंध राशि रुपए 101.1 करोड़ के विरूद्ध 32.92 करोड़ विमुक्त करने की स्वीकृति दी गई। एक अन्य प्रस्ताव में जीएसटी लागू होने के बाद टीडीएस वापसी के लिए वाणिज्यकर विभाग के लिए 25 करोड़ रुपये की राशि झारखंड आकस्मिकता निधि (जेसीएफ) से बजटीय उपबंध करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गयी। गोड्डा जिला के मेहरामा एवं महागामा प्रखंड में बिहार राज्य के साथ संयुक्त अंतरराज्यीय योजना बटेश्वरस्थान गंगा पंप नहर योजना के झारखंड राज्य में पड़ने वाले भाग के कार्यो के लिए प्रदत्त 103.31करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति में इस योजना को ए.आई.बी.पी. में शामिल करने की पूर्व अनुमति की शर्त को विलोपित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी। वहीं झारनेट परियोजना के संचालन के लिए नये ऑपरेटर के चयन की प्रक्रिया पूरी होने तक अभी कार्यरत यूटीएल व विप्रो को ही 31 दिसंबर तक कार्य करने की अनुमति दी गयी है। इस पर 16.17करोड़ का खर्च आएगा।
झारखंड राज्य में गिफ्ट मिल की योजना का क्रियान्वयन के लिए वित्तीय नियमावली के नियम 235 को नियम 245 से शिथिल करते हुए झारखंड मिल्क फेडरेशन को अभिकर्ता मनोनीत किए जाने का निर्णय लिया गया। वहीं पथ निर्माण विभाग के निर्माण कार्यों में यूटिलिटी शिफ्टिंग (बिजली एवं पेयजल एवं स्वच्छता इत्यादि इत्यादि से संबंधित) के कार्यों के प्रक्रिया में संशोधन की स्वीकृति दी गयी। एक अन्य प्रस्ताव में बोकारो जिला अंतर्गत अंचल नावाडीह के विभिन्न मौजा 75 एकड़ गैर मजरूआ खास किस्म जंगल भूमि 15,86करोड़ रुपए मात्र मेसर्स हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा भुगतान के आधार पर डुमरी कोल माइंस परियोजना में उपयोजित होने वाले वन भूमि के विरुद्ध क्षति पूरक वन रोपण हेतु वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, झारखंड के पक्ष में सशुल्क स्थाई हस्तांतरण की स्वीकृति दी गई।

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