मानव तस्करों के चंगुल से छुड़ाकर वापस लायी गयी बच्ची की मौत

 रिम्स में इलाज के क्रम में हुई मौत
रांची,10अक्टूबर। दिल्ली से मानव तस्करों के चंगुल से 25 सितंबर को छुड़ाकर वापस लायी गयी 15वर्षीय बच्ची ने बुधवार सुबह इलाज के क्रम में दम तोड़ दिया।
गोड्डा जिले में पहाड़िया आदिम जनजाति समुदाय की आ बच्ची को मानव तस्करों द्वारा लोभ-लालच देकर दिल्ली ले जाया गया था, जहां से 25 सितंबर को रेस्क्यू कर वापस रांची लायी गयी थी। इसके बाद उसे उसके घर गोड्डा भेज दिया गया। वहां बच्ची की स्थिति बिगड़ने पर पुनःरांची लाया गया और 3 अक्टूबर को रिम्स में भर्त्ती कराया, यहां उसे वेंटिलेटर पर गया था और बेहतर इलाज के लिए एम्स भेजे जाने की तैयारी की जा रही है। इस संबंध में मंगलवार को उसके स्वास्थ्य को लेकर गठित मेडिकल बोर्ड की बैठक भी हुई थी। स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव निधि खरे ने बच्ची को एयर एंबुलेंस से बेहतर इलाज के लिए दिल्ली भेजने का निर्देश दिया था, इस एयर एंबुलेंस का खर्च खुद रिम्स को वहन करना था और बुधवार को उसे एयर एम्बुलेंस से दिल्ली भेजे जाने की तैयारी चल रही थी कि उसकी मौत हो गयी।
झारखंड राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष आरती कुजूर ने बताया कि बच्ची की मौत तड़के साढ़े तीन बजे हुई। उन्होंने बताया कि बच्ची की मौत पूरे समाज को झकझोर कर देने वाली घटना है, तमाम कोशिशों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।
गौरतलब है कि 25 सितंबर को दिल्ली से 16 बच्चों को मानव तस्करों के चंगुल से छुड़ाकर वापस झारखंड लाया गया था,उसमें से दो बच्ची गोड्डा जिले की रहने वाली थी। इस बच्ची के साथ बलात्कार हुआ था और उसे जान से मारने की कोशिश भी की गयी थी। बताया गया है कि एकमात्र इस बच्ची ने मानव तस्करों के खिलाफ गवाही दी थी,लेकिन उसकी भी मौत हो जाने से अनुसंधानकर्त्ताओं को धक्का लगा है।

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