गुमला में दो शक्तिशाली केन बम बरामद, मधुबन में नक्सली बंदी का असर

रांची,12अक्टूबर। झारखंड के गिरिडीह जिले के विश्व प्रसिद्ध जैन तीर्थ क्षेत्र पारसनाथ मधुबन इलाके में नक्सलियों के दो दिवसीय बंद का शुक्रवार को खासा असर देखने को मिला। प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादियों ने 12 और 13 अक्टूबर को दो दिवसीय मधुबन बंदी का ऐलान किया है। इस आह्वान के पहले दिन मधुबन क्षेत्र में तमाम दुकानों का शटर डाउन है। वहीं धर्मशाला औरभोजनालय तक को बंद कर दिया गया है। मधुबन में सितंबर-अक्टूबर महीने में धार्मिक मान्यता के अनुसार देश विदेश से जैन श्रद्धालु यहां पर्वत वंदना व अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते है, लेकिन नक्सली बंदी को देखते हुए तमाम तीर्थयात्री क्षेत्र से निकल पड़े है और पूरा मधुबन यात्रियों से खाली हो गया है।
माओवादियों द्वारा पारसनाथ और आस पास का इलाके में अक्सर खौफनाक वारदातों को अंजाम दिया जाता है, जिसके कारण नक्सलियों के भय से उनके द्वारा बुलाए गए बंद का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। बंद के पहले दिन मधुबन में पूरी वीरांनगी छाई रही और हमेशा चहल-पहल रहने वाला मंदिरों का गांव मधुबन ठहर सा गया है। बताया गया कि पिछले दिनों मजदूर संगठन समिति और जैन ट्रस्ट में मजदूरों के हित को लेकर कई तरह के समझौते हुए थे। लेकिन नक्सली गतिविधियों में लिप्त पाए जाने के कारण सरकार ने मजदूर संगठन समिति पर बैन लगा दिया है। संगठन पर प्रतिबंध लगते ही जैन संगठनों ने उनके साथ हुए समझौते को तोड़ दिया है और मजदूरों का शोषण करने लगे। इन्हीं आरोपों को लेकर इस बार नक्सलियों ने बंद बुलाया है और जैन ट्रस्ट को मजदूरों का शोषण बंद करने की चेतावनी दी है।
इधर, गुमला जिले के बिशुनपुर थाना क्षेत्र के बोरहा जंगल में गुरुवार देर शाम पुलिस ने दो शक्तिशाली केन बम बरामद किए। इन्हें बाद में डिफ्यूज कर दिया गया। पुलिस अधीक्षक अंशुमन कुमार ने बताया कि अभियान में लगे जवानों को नुकसान पहुंचाने के लिए माओवादियों ने यह बम रखे गए थे, जिन्हें विफल कर दिया गया।

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