जैप-ग्राउंड में 1880 से हो रही है शस्त्रों की पूजा

फायरिंग कर मां दुर्गा को दी गयी सलामी
रांची,18अक्टूबर। राजधानी रांची में दुर्गा पूजा नवमी के अवसर पर डोरंडा में गोरखा समाज के द्वारा शक्ति पूजा की जाती है। 1880 से यह पूजा हर साल की जा रही है। जिसमें विभिन्न हथियारों को सजा कर उसकी पूजा होती है। गोरखा समाज के लोगों का मानना है कि हथियारों की पूजा जरूरी है। ताकि उन्हें दुश्मनों से लोहा लेते हुए कभी धोखा न दे। झारखंड सशस्त्र पुलिस (जैप) के जवान पूरे विधि विधान के साथ इनकी पूजा करते हैं।
गोरखा जवानों ने बताया कि ब्रिटिश शासनकाल में जब इस मिलिट्र फोर्स का गठन हुआ, तब इस सैन्य कंपनी के जवानों की तैनाती सीमा पर भी होती है और विधि व्यवस्था को बनाये रखने की जिम्मेवारी भी सौंपी जाती थी, लेकिन अब यह पूरी तरह से स्टेट पुलिस बन गयी है और सिर्फ विधि व्यवस्था की जिम्मेवारी ही सौंपी जाती है।
नवरात्र के मौके पर जैप-वन ग्राउंड में इस बार भी महानवमी के मौके पर परंपरागत तरीके से पूजा-अर्चना की गयी। जैप के गोरखा जवान शक्ति के उपासक है और हर वर्ष अनोखे अंदाज में मां दुर्गा की पूजा करते है। इसी सिलसिले में आज नवरात्रि के मौके पर जवानों ने पहले अपने हथियारों की पूजा की। इसके बाद बंदूक से फायरिंग करके मां को सलामी दी गई। फिर परंपरानुसार बलि दी गयी। जवानों ने जैप कैंपस में अपने सारे हथियारों की पूजा की। इसमें पिस्टल, एके 47, इंसास और लाइट मशीन गन तक शामिल हैं। जैप के एडीजी बताते हैं कि बटालियन में बलि और हथियारों की पूजा का अपना एक खास महत्व होता है। आज के दिन गोरखा जवान अपने हथियारों करे मां दुर्गा के सामने रख देते हैं, फिर उसकी पूजा करते हैं। पूजा के दौरान जवान मां के चरणों में बलि देते हैं। गोरखा जवानो में हथियारों की पूजा की परम्परा इस बटालियन के गठन के समय से ही चली आ रही है।
इस पूजा के पीछे मान्यता है कि दुश्मनों से मुकाबले के समय इनके हथियार कभी धोखा ना दें और सटीक चलें, इसलिए ये मां दुर्गा के सामने हर नवमी को अपने अपने हथियारों की पूजा बड़े ही श्रद्धा भाव से करते हैं। शायद यह भी एक कारण माना जाता है कि आज तक जैप के जवानों को जिस किसी भी ऑपरेशन में लगाया गया, उन्हें हार का सामना नहीं करना पड़ा है।जैप परिसर में महानवमी के अवसर पर कन्या भोजन भी होता है। इससे पहले महिलाएं व्रत तोड़ने के पहले मां के हवन में नाचते गाते शामिल होती हैं। हर बलि पर बंदूकों से सलामी देकर सभी लोग मां दुर्गा की पूजा में लीन रहते हैं। 21 बलि प्रदान होता है और हर बलि प्रदान पर गोली चलाकर मां को सलामी दी जाती है। बलि के पीछे यह तर्क दिया जाता है कि यह बलि देश के दुश्मन रुपी राक्षस की दी जाती है।

Please follow and like us:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *