आदिवासी महिला से शादी कर जमीन खरीदने के धंधे पर लगेगी रोक

 मंत्रिपरिषद ने ओड़िशा राज्य की भांति कानून बनाने व लागू करने की स्वीकृति दी
रांची,6दिसंबर। झारखंड में अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिला से किसी गैर अनुसूचित जनजाति व्यक्ति द्वारा शादी कर काश्तकारी भूमि खरीदने पर अब रोक सकेगी। इस संबंध में मुख्यमंत्री रघुवर दास की अध्यक्षता में आज रांची स्थित झारखंड मंत्रालय में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में एक अहम प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी। इस प्रस्ताव के तहत ओड़िश राज्य की भांति कानून (विनियमन) बनाने और लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी।
बैठक समाप्त होने के बाद भूमि राजस्व एवं निबंधन विभाग के सचिव के.के. सोन ने बताया कि झारखंड मेंअभी छोटानागपुर-संतालपरगना काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी-एसपीटी ) लागू है,ऐसे में कोई भी गैर अनुसूचित जनजाति का व्यक्ति अनुसूचित जनजाति की रैयती जमीन नहीं खरीद सकता है, लेकिन यह देखा गया कि अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिला से शादी कर उसके नाम से कोई भी गैर अनुसूचित जनजाति का व्यक्ति काश्तकारी जमीन को खरीदने में सफल रहता है, इसे देखते हुए वर्ष्ा 2002 में ओड़िसा राज्य में भी कानून बना था। इसी की तर्ज पर झारखंड में भी कानून बनाने और इसे लागू करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गयी है।
के.के.सोन ने बताया कि इस कानून के लागू हो जाने के बावजूद यदि कोई गैर अनुसूचित जनजाति का व्यक्ति अपनी अनुसूचित जनजाति की पत्नी के नाम पर काश्तकारी भूमि खरीदने की कोशिश करता है, तो एसपीटी की धारा 20 और सीएनटी की धारा 71 के तहत उस जमीन को संबंधित भूमि मालिक को वापस दिलाया जा सकेगा।
के.के. सोन ने बताया कि इस कानून को लागू करने को लेकर विधिक परामर्श ली गयी है, जिसके तहत इस रेगुलेशन को राज्यपाल से सहमति मिलने के बाद लागू किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि इस कानून को लागू करने के लिए राष्ट्रपति से सहमति लेनी जरूरी नहीं है।
एक अन्य प्रस्ताव में गैर लाभकारी, चैरिटेबल व धार्मिक संगठनों को शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य कार्यां से संबंधित संस्थान खोलने के लिए रियायती दरों पर भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी है। राज्य के 110 अनुसूचित प्रखंडों में अब इसके तहत शिक्षा और स्वास्थ्य कार्यां के लिए जमीन लेने पर 75 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी।
राज्य सरकार ने पिछले वर्ष टाना भगत समुदाय की जमीन के लिए सभी शुल्क को माफ करते हुए मात्र एक रुपये का टोकन लगान लेने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, लेकिन टाना भगत समुदाय ने इस पर आपत्ति बतायी और उनकी भावनाओं से जुड़ा मामला होने के कारण सरकार ने उसे भी माफ करने का निर्णय लिया है।

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