भारतीय परंपरा में जल का बहुत ऊंचा स्थान-अर्जुन मुंडा


/स्वर्णरेखा महोत्सव
जमशेदपुर,14जनवरी। भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा है कि हमारी भारतीय परंपरा में जल को बहुत ऊंचा स्थान दिया गया है। पूजा-पाठ में जो भी जल लगता है, उसे गंगा जल मानकर पूजा की जाती है। शास्त्रों में भी उसी सामग्री का विसर्जन जल में करने को कहा गया है जिससे नदी-तालाबों को नुकसान नहीं हो। लेकिन आज परिस्थिति उलट हो गई है। विकास की दौड़ में नदियों को हम प्रदूषित करते जा रहे हैं, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि नुकसान नदियों को नहीं बल्कि हमारा खुद का हो रहा है। जरूरत इस बात की है कि हम सभी लोग जहां हैं, वहीं से संकल्प लें कि हम जल का सम्मान करेंगे और जल स्रोतों का संरक्षण और संवर्धन करेंगे। श्री मुंडा आज स्वर्णरेखा क्षेत्र विकास ट्रस्ट युगांतर भारती द्वारा आयोजित स्वर्णरेखा महोत्सव में बोल रहे थे।
स्वर्णरेखा और खरकई नदियों के संगम दोमुहानी पर आयोजित इस संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए झारखंड सरकार के मंत्री सरयू राय ने कहा कि आज मेधावी मस्तिष्क ही पर्यावरण को दूषित करने के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं। आईआईटी, आईआईएम जैसे श्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों से निकले युवा और आईएएस और आईपीएस जैसी सेवाओं में आनेवाले मेधावी लोग आज कॉरपोरेट और सरकारी क्षेत्र के शीर्ष पर हैं और यही लोग नियमों को उलट-पुलट कर पर्यावरण को क्षति पहुंचाने के लिए जिम्मेदार हैं। अगर यह लोग संकल्प ले लें कि वे नियम-कानून और संविधान के दायरे में काम करेंगे तो पर्यावरण खुद-ब-खुद ठीक रहेगा। श्री राय ने घोषणा की कि मकर संक्रांति से अगली मकर संक्रांति तक पूरे एक वर्ष तक नेचर फाउंडेशन के तहत वायु प्रदूषण की समस्या के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जल प्रदूषण के खिलाफ हमने लंबी लड़ाई लड़ी। दिल्ली तक जाकर धरना दिया। दामोदर की सफाई के लिए हमने 2004 से अभियान चलाया। आज नतीजा है कि दामोदर औद्योगिक प्रदूषण से शत-प्रतिशत मुक्त हो गया है। उन्होंने कहा कि अगर हम सरस्वती पूजा में पूजा समितियों से आग्रह करें कि वह शुद्ध मिट्टी से बनी प्रतिमाओं की पूजा करेंगे और नदी में कोई ऐसी वस्तु नहीं डालेंगे, जिससे नदी को नुकसान हो, तो यह बहुत अच्छा कदम होगा। उन्होंने कहा कि शांति समितियां भी इस दिशा में जागरूकता फैलाने के लिए एक अच्छा माध्यम हो सकती हैं।
संगोष्ठी में बोलते हुए डीबीएमएस कैरियर अकादमी के अध्यक्ष भानुमति नीलकंठन ने कहा कि वह 50 दशक से अधिक समय से स्वर्णरेखा को देख रही हैं। पहले स्वर्णरेखा काजल अविरल और निर्मल हुआ करता था। आज यह गंदा हो गया है। इसे मिलजुल कर ठीक करना होगा। डीएवी बिष्टुपुर की प्राचार्या प्रज्ञा सिंह ने कहा की नदियों के किनारे डस्टबिन लगाया जाना चाहिए। जल की महत्ता और उसके संरक्षण के बारे में लोग जागरूक होकर दूसरों को भी प्रेरित करें, तो इस समस्या का निदान हो सकता है। कार्यक्रम का संचालन मनोज सिंह ने किया। स्वर्णरेखा क्षेत्र विकास ट्रस्ट के ट्रस्टी अशोक गोयल ने स्वागत भाषण एवं आनंद कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
इसके पूर्व मंत्री श्री सरयू राय के नेतृत्व में स्वर्णरेखा नदी में नदी पूजन एवं आरती की गई।
संगोष्ठी एवं नदी पूजन कार्यक्रम में जमशेदपुर अक्षेस के विशेष पदाधिकारी .ष्ण कुमार, मानगो अक्षेस के विशेष पदाधिकारी राजेंद्र कुमार गुप्ता, कोल्हान के पूर्व आयुक्त मोहनलाल राय, मुरलीधर केडिया, जवाहर लाल शर्मा, चितरंजन वर्मा, मुकुल मिश्रा, आशुतोष राय, दीपक पारीक, हरेन्द्र पाण्डेय, अजय श्रीवास्तव, नीरू सिंह, गोपाल जायसवाल, आकाश साह, तारक मुखर्जी, मनोज सिंह, सन्नी सिंह के साथ ही काफी संख्या में लोग उपस्थित थे।

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