हर नियुक्तियों में सीओ का जाति प्रमाण पत्र ही अब मान्य होगा


राज्य मंत्रिपरिषद ने दी मंजूरी, जाति प्रमाण निर्गत में आने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए सरल नियमावली

रांची,21फरवरी। झारखंड सरकार ने जाति प्रमाण पत्र निर्गत होने में आने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए एक नया सरकुर्लर जारी करने का निर्णय लिया है। राज्य मंत्रिपरिषद ने अब सूबे में होने वाली हर नियुक्तियों के लिए अंचल अधिकारी द्वारा निगत प्रमाण पत्र को ही मान्य बनाने को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री रघुवर दास की अध्यक्षता में गुरुवार को रांची स्थित झारखंड मंत्रालय में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी गयी।
राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक समाप्त होने के बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग के अपर मुख्य सचिव के.के.खंडेलवाल ने बताया कि जाति प्रमाण पत्र जारी किए जाने के संबंध में आवश्यकताओं को देखते हुए संशोधन कर सरल किये जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसके लिए व्यापक दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। इनमें से यह एक सबसे महत्वपूर्ण है कि राज्य के सरकारी एवं अन्य नियोजनो के लिए अंचलाधिकारी द्वारा निर्गत जाति प्रमाण पत्र वैध होगा। राज्य से बाहर तथा विशेष रूप से उपायुक्त अनुमंडल अधिकारी द्वारा मांगे गए जाति प्रमाण पत्र के संबंध में अंचलाधिकारी द्वारा निर्गत जाति प्रमाण पत्र के आधार पर उच्च अधिकारी तत्काल जाति प्रमाण पत्र निर्गत करेंगे।
उन्होंने बताया कि जाति प्रमाण निर्गत होने में आने वाली परेशानियों को लेकर विस्तृत जानकारी प्राप्त की गयी। पूर्व में कुछ नियुक्तियों के लिए अनुमंडल पदाधिकारी या उससे उच्च पदस्थ पदाधिकारियों द्वारा निर्गत जाति प्रमाण पत्र की जरूरत होती थी, लेकिन अब झारखंड लोक सेवा आयोग या झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग अथवा अन्य नियुक्तियों और शैक्षणिक संस्थानों में अंचल अधिकारी द्वारा निर्गत जाति प्रमाण पत्र ही मान्य होंगे।
इसके अलावा एक अन्य प्रस्ताव में बीसी-1 व बीसी-2 को लेकर नन क्रीमीलेयर से संबंधित प्रमाण पत्र पूर्व में एक वर्ष के लिए मान्य होता था, लेकिन अब इसमें परिवर्त्तन कर यह साफ कर दिया गया है कि यह प्रमाण पत्र बाद में भी मान्य होगा,लेकिन इसके लिए संबंधित घोषणा पत्र देना होगा कि वे नन क्रीमीलेयर के दायरे में आते है। उन्होंने यह भी कहा कि गलत घोषणापत्र या शपथ पत्र देने वालों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई तय कानून के तहत होगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि जिन विद्यार्थियों को छात्रवृति लेती है, उनके लिए क्रीमीलेयर प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं होती है, ऐसे लोगों का बीसी-1 व बीसी-2 का प्रमाण पत्र बनने में कोई कठिनाई नहीं होगी और यह प्रमाण पत्र स्थायी होगा। इसके लिए अलग से फार्मा निर्धारित की गयी।
अपर मुख्य सचिव ने बताया कि जाति प्रमाण पत्र पिता की जाति के आधार पर होगा, इसे स्पष्ट करने के लिए भी आवश्यक प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र उन्हीं को मिलेगा, जो राज्य में 10 अगस्त 1950 के पहले से रह रहे लोगों को ही मिलेगा, इसी तरह से अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र 6 सितंबर 1950 के पूर्व से यहां रहने वाले लोगों और बीसी-1 एवं बीसी-2 का प्रमाण पत्र 10 नवंबर 1978 से पहले रहने वाले लोगों को मिलेगा। साथ ही भूमिहीन को भी जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने के लिए पूरी प्रक्रिया को परिभाषित कर दिया गया है। इस पहले जो समस्या आ रही थी कि जाति प्रमाण पत्र बनाने में काफी विलंब हो रहा था, लेकिन अब सबकुछ स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी हो चुका है,इसलिए विलंब नहीं होगा, पूर्व में ही 60 दिनों में जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने का प्रावधान है।

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