योजनाओं के समयबद्ध कार्यान्वयन से अच्छे परिणाम आएंगेःसीएम

रांची,27मई।मुख्यमंत्री अर्जुन मुण्डा ने कहा कि पारदर्शी तरीके से विकास की योजनाओ के समयबद्ध कार्यान्वयन के अच्छे परिणाम आ सकते है। अतएव आगामी पंच वर्षीय योजना के स्वरुप तय करने के लिए योजना आयोग की क्षेत्रीय बैठक के लिए अनिवार्यता एवं लक्ष्य आधारित विकास योजनाओं का प्रस्ताव राज्य सरकार की ओर से दिया जाना है। मुख्यमंत्री अर्जुन मुण्डा आज स्कीपा के सभागार में आयोजित मंत्रीगण एवं विभागीय सचिवों की संयुक्त बैठक को संबोधित कर रहे थे।
उन्होने कहा की योजनाओं के लक्ष्यों के निर्धारण, उनके कार्यान्वयन में वर्तमान नियमों अथवा निर्धारित प्रक्रियाओं के कारण यदि कोई व्यावहारिक कठिनाई हो तो संबंधित विभाग अपने प्रस्ताव मंत्र्ािमंडल के समक्ष लाएँ। उन्होने कहा कि चालू पंचवर्षीय योजना की वित्तीय एवं भौतिक उपलब्धियों की समीक्षा कर अगली पंचवर्षीय योजना का प्रस्ताव किया जाना चाहिए ताकि विकास का न्याय-पूर्ण वितरण एवं योजनाओं का कार्यान्वयन आम जनता की आंकाक्षाओं एवं जरुरतों के मुताबिक हो। उन्होने आवश्यकता आधारित योजना के स्वरुप निर्धारित किए जाने की जरुरतों को रेखांकित करते हुए कहा कि स्थानीय परिस्थितियों एवं जरुरतों के अनुरुप् व्यावहारिक एवं उद्देश्यपरक योजनाओं को लिया जाना चाहिए ताकि जहाँ पर कमियों रही हों उन्हे दूर किया जा सके।
सतत विकास को निरंतर प्रक्रिया बताते हुए उन्होने कहा कि आने वाले वर्षो के लिए हमें सोचना है कि सूबे में उपलब्ध मानव श्रम का अधिकतम गुणव ाापूर्ण प्रयोग कैसे किया जाए।इसके लिए उत्पादक श्रम-शक्ति की उपयोगिता की योजनाएँ ली जानी चाहिए।
पर्यावरण चेतना के वर्तमान वैश्विक परिदृश्य को रेखांकित करतेे हुए मुख्य मंत्र्ाी अर्जुन मुण्डा ने कहा कि झारखण्ड राज्य में वन संरक्षण के माध्यम से पारिस्थितिक संतुलन के उदाहरण मौजूद है जिसके प्रसार की जरुरत है। उन्होने प्रदूषण मुक्त उर्जा के उत्पादन के लिए राज्य की योजना के निर्मण की आवश्यकता जताई।
योजनाओं के कार्यान्वयन में पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका पर बल देते हुए उन्होने कहा कि इनके सशक्तिकरण और उन्मुखीकरण के जरिए विकास के नए मानक स्थापित किए जा सकते हैं। सरकार की आंतरिक संचार-प्रणाली को दुरुस्त किए जाने के साथ-साथ उन्होने हरेक स्तर पर निर्धारित दायित्वों के सतत पर्यवेक्षण को विकास के लिए जरुरी बताया।
उपमुख्यमंत्र्ाी हेमंत सोरेन ने कहा कि प्रदेश के समक्ष कई चुनौतियाँ है जिनके समाधान के लिए लम्बी अवधि और कम अवधि की योजनाओं को प्राथमिकताएँ निर्धारित की जानी चाहिए। आधारभूत संरचना, रोजगार सृजन सहित कृषिगत क्षेत्र्ाों के विकास के लिए योजना निर्माण पर बल देते हुए उन्होने कार्य-संस्कृति में बदलाव की जरुरत बताई।
उपमुख्यमंत्र्ाी सुदेश महतो ने कहा कि जरुरी है कि योजानाओं का काम निर्धारित समय-सीमा में हो और कार्यो की शुरुआत वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ हो न कि वित्तीय वर्ष की समाप्ति के करीब। मॉनिटरिंग के लिए फाईल टैªकिंग को जरुरी बताते हुए उन्होने कहा कि वर्तमान पंचवर्षीय योजना के अंतिम वित्तीय वर्ष के लक्ष्यों को चुनौती के रुप में लिया जाना चाहिए।
इस मौके पर कल्याण मंत्र्ाी चंपई सौरेन, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्र्ाी हाजी हुसैन अंसारी, समाज कल्याण मंत्र्ाी विमला प्रधान, शिक्षा मंत्र्ाी बैजनाथ राम, कृषि मंत्र्ाी सत्यानन्द झा बाटुल, उपाद एवं मद्य्ननिषेध मंत्र्ाी गोपाल कृष्ण पातर सहित मुख्य सचिव एस0 के0 चौधरी, विकास आयुक्त देवाशीष गुप्त एवं सभी विभागीय सचिव तथा वरीय पदाधिकारीगण मौजूद थे।

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