नथवाणी ने राज्यपाल से हस्तक्षेप की लगायी गुहार

इस्लामनगर के विस्थापितों के पुनर्वास का आग्रह
रांची,6अप्रैल। राज्यसभा सांसद परिमल नथवाणी ने राज्यपाल डॉ. सैय्यद अहमद को पत्र लिखकर अतिक्रमण हटाओ अभियान से प्रभावित इस्लामनगरवासियों के पुनर्वास का आग्रह किया है।
नथवाणी ने राज्यपाल को लिखे पत्र में बताया है कि पिछले वर्ष झारखण्ड सरकार ने अतिक्रमण हटाओ अभियान के नाम पर रांची के दो रिहायशी इलाकों क्रमशः नागाबाबा खटाल एवं इस्लामनगर को बेरहमी से ढ़ाह दिया था। उन्होंने बताया कि विगत 40-50 सालों से वहां रह रहे गरीब, असहाय एवं मजदूर किस्म के हजारों लोगों के अशियाने को विध्वंश कर उन्हें सड़कों पर जीवन व्यतित करने के लिए मजबूर कर दिया था।
रास सांसद ने बातया कि उच्च न्यायालय के द्वारा 12 मई 2011 को पारित आदेश में स्पष्ट है कि झारखण्ड सरकार ने अपने प्रति-शपथपत्र में एवं न्यायालय के समक्ष भी सहमति जतायी थी कि 13 माह के अन्दर इस्लामनगर के उजाड़े गए परिवारों को पक्का मकान/फ्लैट बनाकर उन्हें पुनर्वासित किया जाएगा । लेकिन एक साल बीतने के बावजूद अभी तक यथास्थित बनी हुई है। 13 माह बीतने में मात्र्ा 1 माह की अल्पअवधि ही बची है। बावजूद इसके इस्लामनगर के गरीब लोगों को बसाने के लिए कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया है। नथवाणी ने बताया कि उन्होंने अपने निजी कोष से उक्त इस्लामनगर में आधारभूत नागरिक सुविधा मुहैया कराने के लिए जलमिनार, पेय जल की व्यवस्था, नाले का निर्माण, बच्चों के लिए पार्क, स्कूल कमरों एवं चहार दीवारी, महिलाओं लिए शौचालय का निर्माण, सड़क, नाली आदि का निर्माण कराया था, ताकि राजधानी में बसी इस बड़ी आबादी को मूल सुविधाएं मिल सके। परंतु इन सबकी अनदेखी करते हुए इतने बड़े जनसमूह को किसी दूसरी जगह पर बसाए बगैर सरकार ने पूरी बस्ती को मलबे में तब्दील कर दिया। बस्ती को उजाड़ना ह्रदय विदारक था। उन्होंने यह भी बताया कि
इस्लामनगर में ये उजड़े परिवार विगत 50 वर्षाें से यहां जीवन व्यतीत कर रहे हैं। ये सभी 1967 के दंगा पीडित लोग है जिन्हें यहां आश्रय मिला था। इनके पास सरकार एवं प्रशासन द्वारा दिया गया वोटर पहचान पत्र्ा, राशन कार्ड एवं लाल कार्ड जैसे प्रमाण भी मौजूद हैं। इतना ही नहीं संयुक्त बिहार के समय विधान परिषद प्रो0 जाबीर हुसैन के आदेशानुसार नगर विकास समिति ने बाकायदा इस्लामनगर का सर्वे किया था जिसके बाद समिति के अध्यक्ष निलांबर चौधरी ने अनुशंसा की थी कि पोलिटेकनिक के 8.434 एकड़ भूमि जो पोलिटेकनिक के वास्तविक परियोजना में नहीं आता है, उसे रेखांकित कराकर रांची पोलिटेकनिक द्वारा रांची क्षेत्र्ाीय प्राधिकार, रांची को हस्तांतरित कर दे तथापि रांची क्षेत्र्ाीय प्राधिकार इस आदेश के आलोक में झुग्गी झोपड़ी आवासीय सुधार के तहत यहां के बाशिंदों को पक्का मकान/फ्लैट बनाकर दे । जिसके बाद 6 फरवरी 2010 को शहरी विकास विभाग, झारखण्ड सरकार द्वारा सर्वे कराकर पोलिटेकनिक की उक्त भूमि पर बीएसयूपी के तहत बहुमंजिली इमारत बनाने का टेंडर एक से ज्यादा बार निकाला गया था। ऐसे में अतिक्रमण के नाम पर उक्त स्थान पर बसे गरीबों पर बुलडोजर चलाना दुर्भाग्यपूर्ण था। उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया कि अब जब कि नैतिकता के आधार पर और कनून की दृष्टि में भी इन उजाड़े गए लोगों को तत्काल पक्के आवास मुहैया कराने की सरकार की जिम्मेदारी बनती है और सरकार की तरफ से इस दिशा में कोई समयोचित कार्रवाई होती नहीं दिख रही,ऐसी स्थिति में वे राज्य सरकार को तत्काल आवश्यक कदम उठाने का दिशा निर्देश दें।

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