भाजपा-झामुमो के बीच संवादहीनता की स्थिति!

भाजपा ने झामुमो दिया झटका


रांची,19अप्रैल।क्या मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा एग्रेसिव हो गये है? क्या मुंडा अब झामुमो की धौंस बर्दाश्त नहीं करेंगे? क्या वे राज्य विधानसभा चुनाव की ओर जा रहे है? मुख्यमंत्री मुंडा के हालिया फैसले से तो यही लगता है। राज्यसभा चुनाव को लेकर झमुमो मुख्यमंत्री को बराबर धौंस दिखाता रहा है। परंतु झामुमो के धौंस से अलग भाजपा ने आज राज्यसभा चुनाव के लिए पूर्व सांसद एसएस आहलुवालिया को राज्यसभा का टिकट दे दिया है। वहीं मुख्यमंत्री ने व्यापक पैमाने पर एसडीओ स्तर के अधिकारियों का तबादला कर दिया है
ज्ञात हो कि राज्य में सरकार चलाने में झारखंड मुक्ति मोर्चा हरेक मामले में हस्तक्षेप करता रहा है और अड़ंगा डालता रहा है। झामुमो के हस्तक्षेप के कारण ही राज्य में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति नहीं हो पायी है और बोर्ड-निगमों का भी गठन नहीं हो पाया है। राज्यसभा चुनाव कोलेकर भी झामुमो ने व्यक्तिगत स्वार्थ का उम्मीदवार उतार कर बराबर भाजपा को धमकी देता रहा है। झामुमो का कोई राजनीति दिशा व दशा भी नहीं है।झामुमो केवल निजी हित के मद्देनजर राज्य में सत्ता संचालन के लिए दबाव डालता रहा है।
लेकिन लगता है अब भाजपा झामुमो के साथ आर-पार की लड़ाई लड़ने की मूड में है और झामुमो को दो टुक फैसला देने की तैयारी में है। सत्तारुढ़ बड़े साझीदार झामुमो और भाजपा में अब लगता है कि संवादहीनता की स्थिति भी है। यही वजह है कि राज्यसभा चुनाव को लेकर दोनों दलों के बीच सहमति बनाने के बजाए दोनों ही दलों ने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। भाजपा द्वारा राज्यसभा में उम्मीदवार दिये जाने के बाद झामुमो सकते में आ गया है। यद्य्नपि झामुमो की ओर से इस मुद्दे पर खुलकर बयानबाजी नहीं की जा रही है,लेकिन अंदर ही अंदर झामुमो द्वारा भाजपा को औकात बताने की कोशिश की जा रही है।

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