भ्रष्ट अफसरों की खैर नहीं, अवैध संपत्ति होगी जब्त

झारखंड विशेष न्यायालयों के अध्यादेश 2012 राज्यपाल के समक्ष
रांची,28अप्रैल ।बिहार के तर्ज पर भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए राज्य की अर्जुन मुंडा सरकार ने भी ठोस पहल की है। इस मामले में मुख्यमंत्री अजु्रन मुंडा ने ’झारखण्ड विशेष न्यायालयों के अध्यादेश, 2012’ की मंजूरी देते हुए स्वीकृति हेतु राज्यपाल को भेज दी है। इस अध्यादेश के जरिये भ्रष्टाचार संबंधी किसी लोक सेवक के विरुद्ध दायर मामले के अंतिम रुप से निष्पादन तक उनके द्वारा अवैध रुप से अर्जित सम्पत्तियों को जब्त किया जा सकेगा। इस अध्यादेश में सत्र न्यायाधीश व अपर सत्र्ा न्यायाधीश स्तर के न्यायिक पदाधिकारी की अध्यक्षता में गठित किए जाने वाले विशेष न्यायालयों के गठन संबंधी ’झारखण्ड विशेष न्यायालयों के अध्यादेश, 2012’ के प्रारुप में प्रावधान किया गया है।
ज्ञातव्य है कि बड़ी संख्या में लोक सेवकों के द्वारा अवैध एवं भ्रष्ट तरीके से ज्ञात एवं वैधानिक न्याय-श्रोतों से काफी अधिक मात्रा में आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के कई दृष्टांत निगरानी विभाग के समक्ष आए है। वर्तमान में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 1988 के तहत निष्पादन हेतु न्यायालय की संख्या के अनुपात में भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों की संख्या इतनी बड़ी है कि इन मामलों के ससमय निष्पादन में समय लगता रहा है। फलस्वरुप निष्पादन की अवधि में भ्रष्ट लोक सेवक द्वारा एकत्रित सम्पति की बिक्री कर दी जाती है या किसी अन्य माध्यम से स्थानांतरित कर दी जाती है। संबंधित अभियुक्त के विरुद्ध मामले के निष्पादन होने तक उपरोक्त स्थिति पैदा होने के फलस्वरुप नई प्रकार की कानूनी जटिलता उत्पन्न हो जाती है। परंतु भ्रष्ट आचरण में संलिप्त ऐसे व्यक्तियों को अभियोजित करना एवं उनके द्वारा अवैध ढंग से अर्जित सम्पतियों को जब्त करना राज्य सरकार का दायित्व बनता है। अतः भ्रष्टाचार संबंधी किसी लोक सेवक के विरुद्ध दायर मामले के अन्तिम रुप से निष्पादन तक उसके द्वारा अवैध रुप से अर्जित सम्पति का अधिग्रहण करने एवं ऐसे मामलों के त्वरित निष्पादन हेतु सरकार ने विशेष न्यायालयों के गठन का निर्णय लिया है।
विशेष न्यायालय इस प्रकार के इस प्रकार के मामले में संज्ञान लेगी एवं मामले के मुख्य आरोपी एवं षड्यंत्र्ाकर्त्ताओं के बारे में संयुक्त रुप से विचार करेगी। आवेदन प्राप्त होने पर विशेष न्यायालय 30 दिनों के भीतर दोषसिद्ध भ्रष्ट लोक सेवक के आय, उर्पाजन या आस्तियों का वह स्रोत जिसके द्वारा या जिसके माध्यम से उसने धन या संपत्ति अर्जित की है, के बारे में नोटिस भेजेगा। इस अधिनियम के लागू हो जाने के बाद संबद्ध प्राधिकृत पदाधिकारी भ्रष्ट लोक सेवकों के साथ-साथ ऐसे सभी लोगों की सम्पत्ति जब्त कर सकेंगे जिनके कब्जे में इस प्रकार की अवैध रुप से भ्रष्ट तरीके से अर्जित की गई सम्पत्ति है। यद्य्नपि कोई व्यक्ति यह आवेदन दें कि वे प्रश्नगत सम्पत्ति में मात्र निवास कर रहें हैं तो प्राधिकृत पदाधिकारी उसे उससे तत्काल बेकब्जा करने के बदले ऐसे व्यक्ति को विनिर्दिष्ट सीमित अवधि के लिए राज्य सरकार को बाजार दर पर किराया का भुगतान कर उसका कब्जा रखने की अनुमति दे सकेगा और उसके बाद वह व्यक्ति उस सम्पत्ति का कब्जा सरकार को सौंप देगा।

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