महिलाओं के विरुद्ध अपराध में झारखंड व दिल्ली के बीच होड़

नथवाणी के सवाल के जवाब में गृहमंत्रालय ने आंकड़े दिये
रांची,2अप्रैल। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा दी गयी सूचना के मुताबिक देश में वर्ष 2008, 2009 व 2010 में महिलाओं के विरुद्ध अपराध के क्रमशः 1,95,856, 2,03,804 और 2,13,585 मामले दर्ज किए गए। यह जानकारी केंद्रीय गृहमंत्री जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा में सांसद परिमल नथवाणी के एक सवाल के जवाब में दी।
केंद्रीय मंत्री की ओर से सदन के पटल रखे गए विस्तृत ब्यौरे के मुताबिक महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की संख्या की ॰ष्टि से झारखंड और दिल्ली के शहर के बीच होड़ लगी दिखायी दे रही है। वर्ष 2008 में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की संख्या झारखंड में 3,183 थी, तो दिल्ली जैसे मेट्रो सिटी में यह संख्या 3,515 थी। इसी तरह वर्ष 2009 में झारखंड में महिलाओं के विरुद्ध 3,021 अपराध दर्ज हुए, तो दिल्ली में 3,701 और वर्ष 2010 में झारखंड में 3,087 और दिल्ली में 3,886 अपराध महिलाओं के विरुद्ध हुए। चार महानगरों चेन्नई, दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में से चेन्नई शहर में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की संख्या सबसे कम है। बताया गया है कि महिलाओं के खिलाफ मुख्य रुप से बलात्कार, अपहरण, दहेज हत्या, छेड़छाड़, यौन शोषण, पति व रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता, लड़कियों का आयात, मानव दुर्व्यापार, महिलाओं का अभद्र प्रदर्शन जैसे विभिन्न अपराध महिलाओं के खिलाफ हो रहे है। सदन में दिये गए आंकड़ों के मुताबिक एक बात यह भी उभर कर सामने आयी है कि सती निवारण अधिनियम के तहत एक भी मामला चार महानगरों और झारखंड में इन वर्षाे के दौरान दर्ज नहीं हुआ।
गृहमंत्री की ओर से बताया गया कि झारखंड से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं। झारखंड के 24 जिलों में से 22 में महिला पुलिस अधिकारियों के नेतृत्व में विशेष महिला पुलिस स्टेशन स्थापित किए गए है। बालिकाओं पर विशेष ध्यान देते हुए सभी पुलिस स्टेशनों में विशेष किशोर पुलिस इकाईयां बनायी गयी है। झारखंड में आयी अपराध पीड़ित बालिकाओं और महिलाों के ठहरने के लिए अस्थायी स्थान उपलब्ध कराने के लिए दिल्ली में शॉर्ट स्टे होम स्थापित किए गए है। दिल्ली और रांची में अपराध पीड़ित महिलाओं की सहायता के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर 18003456531 और 1003456526 भी शुरु किए गए है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत के संविधान की सातवीं सूची में अंतर्गत पुलिस व लोक व्यवस्था राज्य के विषय है, तथापित केंद्र सरकार महिलाओं के प्रति अपराध निवारण और नियंत्र्ाण के मामले को सर्वाधिक महत्व देती है।

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