मांग व आपूर्ति के बीच अंतर के कारण कोयले का आयात बढ़ा


रांची,8मई। कोयला की अनुमानित मांग और आपूर्ति के बीच भारी अंतर के कोयले के आयात में बढ़ोत्तरी हुई है।
राज्यसभा सांसद परिमल नथवाणी के एक सवाल के जवाब में केंद्रीय कोयला राज्य मंत्री प्रतिक प्रकाश बापु पाटिल ने बताया कि वर्ष 2008-09 में यह अंतर 60.83 मिलियन टन था, जो वर्ष 2011512 में बढ़कर 161.50 मिलियन टन हुआ। इसी प्रकार इस अवधि के दौरान कोल का आयात भी 59 मिलियन टन से बढ़कर 98.9 मिलियन टन हुआ।इस अवधि के दौरान उत्पादन में अपेक्षाकृत कम वृद्धि और मांग में उससे ज्यादा वृद्धि के कारण यह अंतर देखा गया।
उन्होंने बताया कि सरकार ने देश में कोयले का उत्पादन बढ़ाने के लिए शृंखलाबद्ध कदम उठाए है। उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ाने के लिए पर्यावरण व वन विभाग की मंजूरिया जल्द से जल्द प्राप्त करने, रेल रैक की उपलब्धता बढ़ाने और भूमि अधिग्रहण तथा कानून व्यवस्था में सहायता के लिए राज्य सरकार से सहयोग प्राप्त करने की कोशिश की गयी है। उन्होंने बताया कि कोल इंडिया लिमिटेड और उसकी सहायक कंपनियों द्वारा भी अनेक कदम उठाएं गए हैं, इनमें उपकरणों की कार्यक्षमता बढ़ाना, उनकी नियमित मॉनिटरिंग, यांत्रिकीकरण और पर्यावरण तथा वन विभाग की मंजूरियों से संबंधित तथा भूमि अधिग्रहण एवं कानून व्यवस्था के प्रश्नों का समाधान जैसे कदम शामिल है।
कोयला खंडों की प्रतिस्पर्धात्मक बोली के विषय में नथवाणी ने बताया कि राज्य सरकार ने भारत के राज-पत्र्ा में ’कोयला खान नियमावली 2012 की प्रतियोगी बोली द्वारा निलामी को 2 फरवरी 2010 को अधिसूचित किया। उन्होंने बताया कि कोयला ब्लाकों का आवंटन आगे से इस अधिनियम के संशोधित प्रावधानों तथा उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के अनुसार किया जाएगा।
पाटिल ने यह भी कहा कि कोयला क्षेत्र में संसाधनों को विनियमित करने और संरक्षण करने तथा उनसे संबंधित मामलों तथा तत्संबधी घटनाओं के संबंध में एक कोयला विनियामक प्राधिकरण का गठन किए जाने का प्रस्ताव भी है। प्रस्तावित विनियामक सभी कंपनियों के लिए कोयला क्षेत्र में समान स्तर बनाने, कोयले का किफायती मूल्य निर्धारित करने और कार्य निष्पादन के मानदंड आदि मुद्दों का समाधान करेगा।

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