May 24, 2022

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6वर्ष की उम्र में माओवादियों ने जबरन संगठन में किया था शामिल

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/22 वर्षाें में 67 बड़ी घटनाओं को अंजाम देने के बाद 10लाख के इनामी सुरेश मुंडा ने सहयोगी के साथ किया सरेंडर
रांची। प्रतिबंधित नक्सली भाकपा-माओवादी के दो इनामी सदस्यों ने मंगलवार को पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया गया। ऑपरेशन नई दिशा के तहत सरकार के आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर रांची जोनल आईजी कार्यालय में आयोजित एक समारोह में 10 लाख के इनामी सुरेश मुंडा और 2 लाख के इनामी माओवादी लोदरा लोहरा ने आईजी अभियान एवी होमकर के के समक्ष सरेंडर किया। इस मौके पर रांची जोनल आईजी, डीआईजी, एसटीएफ और सीआरपीएफ के वरीय अधिकारी मौजूद थे।
आईजी ऑपरेशन ने बताया कि आत्मसर्पण करने वाले सुरेश मुंडा के खिलाफ 67 मामले दर्ज है, जबकि लोदरो मुंडा के खिलाफ 54 मामले दर्ज है।
आईजी ऑपरेशन ने बताया कि  झारखंड-बिहार में  90 के दशक में जब नक्सली गतिविधियां चरम थी, उस वक्त संगठन विस्तार के लिए माओवादी नेता हर गांव से कुछ बच्चे और युवाओं को अपने साथ ले जाते थे,ताकि माओवादियों की गतिविधियों की सूचना कोई पुलिस को नहीं दें। इसी क्रम में रांची के बुंडू-तमाड़ इलाके में 1997-98 में माओवादी कमांडर कुंदन पाहन का दस्ता सक्रिय था। कुंदन पाहन ने रांची के बुंडू थाना क्षेत्र के बारूहातु गांव निवासी सुरेश मुंडा को अपने दस्ते में शामिल करने के लिए जबरन गांव-घर से साथ ले जाया गया था। इसके बाद सुरेश को सबसे पहले 1998 में जनमिलिशिया का काम दिया गया था और पुलिस की गतिविधि की सूचना नक्सली संगठन तक पहुंचाने की जिम्मेवारी थी। करीब 12-13 वर्ष की उम्र तक सुरेश कुंदन पाहन के दस्ते में रहा और 2002 उसे एरिया कमांडर बनाया गया, लेकिन 2004 में उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और जेल में 6 वर्षाें तक के बाद वह नकुल यादव और दिनेश चश्मा के दस्ते में काम करने लगा। बाद में वह सारंडा के पोड़ाहाट जंगल में सक्रिय हो गया और 2012 में उसे सब जोनल कमांडर बनाया गया। इस दौरान उसने कई बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया गया, जिसमें पुलिसकर्मियों पर हमला, हथियार लूट और आईईडी विस्फोट की घटना शामिल है।

वहीं 2 लाख के इनामी नक्सली लोदरो लोहरा उर्फ सुभाष वर्ष 2010 में संगठन से जुड़ा और उसके खिलाफ विभिन्न थानों में 54 अपराधिक मामले दर्ज है। खूंटी जिले के अड़की थाना क्षेत्र का रहने वाला  लोदरो लोहरा घर में रहकर ट्रैक्टर चलाने का कार्य करता था, लेकिन कुंदन पाहन की धमकी के बाद वह भी 2010 में संगठन से जुड़ गया।