September 25, 2026

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कुरमी-कुड़मी जाति के मसले पर टीआरआई से फिर मांगी गयी रिपोर्ट

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रांची। झारखंड में कुरमी-कुड़मी जाति को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिये जाने के मसले पर एक बार फिर से राजधानी रांची स्थित डॉ0 रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान से रिपोर्ट मांगी गयी है।
कार्मिक विभाग से मिली जानकारी के अनुसार डॉ0 रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याणशोध संस्थान के 2020 के प्रतिवेदन में झारखंड में निवास करने वाले कुरमी-कुड़मी (महतो) जाति को न तो अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में और न ही अनुसूचित जाति की श्रेणी में रखे जाने की अनुशंसा की गयी। संस्थान की ओर से इस जाति के मसल ेपर यथास्थिति बनाये रखने की अनुशंसा की गयी हैं, लेकिन मॉनसून सत्र के दौरान भाजपा के जयप्रकाश भाई पटेल द्वारा लये गये गैर सरकारी संकल्प पर प्रभारी मंत्री द्वारा सदन में दिये गये वक्तव्य के बाद 14 फरवरी को शोध संस्थान से अद्यतन प्रतिवेदन की मांग की गयी। वर्तमान में कुड़मी, कुरमी जाति राज्य के अत्यंत पिछड़े वर्गाे की सूची अनुसूची 1 के क्रमांक 6 पर सूचीबद्ध है।
हालांकि कार्मिक, प्रशासनिक सुधान और राजभाषा विभाग द्वारा यह भी स्वीकार किया गया है कि 23 नवंबर 2004 को कैबिनेट की बैठक में अन्य निर्णय के साथ-साथ फैसला लिया गया था कि छोटानागपुर की कुरमी-कुड़ती तथा उत्तरी छोटानागपुर तथा संताल परगना की घटवार जाति को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने के लिए केंद ्रसरकार से अनुशंसा की गयी। जिसमें कहा गया कि ये जातियां 1913 और 1938 में जनजाति की सूची में थी, लेकिन वर्ष 1950 और 1952 की सूची में शामिल न किये जाने के कारण स्पष्ट नहीं हैं। इन जातियों के अनुसूचित जनजाति में शामिल करने के लिए उठती मांगों के आधार पर भारत सरकार उन्हें अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने के लिए पुनर्विचार करें।
शोध संस्थाल की ओर से 1989 से 2018 तक 7 अध्ययन प्रतिवेदन का सारांश उपलब्ध कराया गया, जिसमें घटवार-घटवाल जाति को भुईंया (अनुसूचित जाति) से उत्पत्ति होने तथा सदृश्य लक्षणों के आधार पर एसटी में शामिल करने पर विचार किये जाने का निष्कर्ष अंकित हैं। फिलहाल घटवार जाति राज्य के पिछड़ों वर्गाे की अनुसूची 2 के क्रमांक 7 पर सूचीबद्ध हैं।

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