April 19, 2026

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झारखंड में लगातार चौथे उपचुनाव में बीजेपी को झटका

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अर्जुन , अन्नपूर्णा, रघुवर, बाबूलाल, दीपक व धर्मपाल समेत सभी बीजेपी सांसदों-विधायकों पर बंधु तिर्की पड़े भारी
रांची। देशभर में हर चुनाव की तरह बीजेपी ने मांडर विधानसभा उपचुनाव को लेकर पूरी गंभीरता के साथ लड़ा। पार्टी प्रत्याशी गंगोत्री कुजूर की जीत सुनिश्चित करने के लिए बीजेपी ने पूरी ताकत झोंक दी, केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, अन्नपूर्णा देवी, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी, प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, संगठन महामंत्री धर्मपाल समेत पार्टी के तमाम सांसदों-विधायकों ने चुनाव प्रचार के दौरान दर्जनों नहीं, बल्कि सैकड़ों छोटी-बड़ी सभाओं को संबोधित किया, सघन जनसंपर्क अभियान चलाया। लेकिन मांडर में पिछले तीन दशक में अलग-अलग पार्टियों के छह सिंबल पर चुनाव लड़ कर तीन बार जीत हासिल करने वाले पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने इस बार सातवें सिंबल पर अपनी बेटी को चुनाव जीताने में सफलता हासिल की और वे इस चुनाव में प्रदेश बीजेपी के तमाम नेताओं पर भारी पड़े।

वर्ष 2019 के बाद लगातार चौथे उपचुनाव में बीजेपी को मिली हार
झारखंड में वर्ष 2019 के बाद से अब तक चार विधानसभा क्षेत्रों के लिए उपचुनाव हो चुके है, इन चारों ही उपचुनाव में बीजेपी प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा है। सबसे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बरहेट और दुमका दोनों सीट से जीत हासिल करने के बाद एक सीट छोड़ने की बाध्यतता के कारण दुमका सीट छोड़नी पड़ी। इस पहले उपचुनाव में हेमंत सोरेन के छोटे भाई और जेएमएम प्रत्याशी बसंत सोरेन चुनाव जीतने में सफल रहे। इस बीच कोरोना के कारण मधुपुर के विधायक और सरकार में शामिल अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हाजी हुसैन अंसारी की मौत हो गयी। जिसके बाद हुए उपचुनाव में हाजी हुसैन अंसारी के पुत्र और जेएमएम उम्मीदवार हफीजुल अंसारी विजयी हुए। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बेरमो विधायक राजेंद्र प्रसाद सिंह की लंबी बीमारी के कारण मौत हो गयी। जिसके बाद हुए उपचुनाव में उनके पुत्र अनूप सिंह उर्फ जयमंगल सिंह विजयी रहे। अब चौथे उपचुनाव में भी महागठबंधन समर्थित कांग्रेस प्रत्याशी शिल्पी नेहा तिर्की विजयी रही।

आदिवासी मतदाताओं पर बीजेपी का घटता प्रभाव
वर्ष 2019 के विधानसभा में बीजेपी ने आदिवासियों के लिए आरक्षित 28 में से सिर्फ दो सीट पर जीत हासिल की थी। इस बार बीजेपी को यह उम्मीद थी कि राष्ट्रपति पद के लि आदिवासी प्रत्याशी के रूप में द्रौपदी मुर्मू के चयन से पार्टी पर जनजातीय मतदाताओं का विश्वास बढ़ेगा, लेकिन अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित मांडर विधानसभा उपचुनाव में भी बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा।

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