रांची। आर्थिक मामलों के जानकार सूर्यकांत शुक्ला (Suryakant Sukla) का मानना है कि मंहगाई का दबाव झेल रही देश की अर्थव्यवस्था में सामान्य आबादी के लिए कपड़े और जूते (textile and leather industry) नये साल की शुरुआत से ही और मंहगे हो जायेंगे ,क्योंकि केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड ने कपड़ा और परिधान पर जीएसटी दर को 5 प्रतिशत से बढ़ा कर 12प्रतिशत करने का नोटिफिकेशन 18 नवम्बर को जारी कर दिया जो पहली जनवरी से प्रभावी होने वाला है ।
सूर्यकांत शुक्ला ने कहा कि कपड़ा क्षेत्र में कर दरों में एकरूपता लाने और उल्टे कर ढांचे जनित मुश्किलों को हल करने के उद्देश्य से ही सरकार ने टैक्स दरों में बदलाव का यह निर्णय लिया है ,परन्तु उल्टे कर ढांचे का मुद्दा तो मानव निर्मित फाइबर और यार्न क्षेत्र से ही जुड़ा है जो पूरे टेक्सटाइल क्षेत्र का 15प्रतिशत है जबकि 85प्रतिशत वाला काटन और रेशम क्षेत्र का यह मुद्दा नही है ।
उल्टा कर ढांचा का मामला तब बनता है जब कच्चे माल पर टैक्स की दर ज्यादा होती है तैयार उत्पाद की तुलना में जिसे सरकार ब्यापारियों को वापस करती है। यह सच है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट रिफंड का मामला पहले से चला आ रहा लंबित मामला है। परन्तु हल को जो तरीका अपनाया गया और लागू करने का जो समय चुना गया उसको लेकर कपड़ा क्षेत्र के बड़े भाग के व्यापारियों मे काफी निराशा है और उपभोक्ताओं में भी हलचल है।
टैक्स दर की बढोतरी से न सिर्फ उपभोक्ता को ज्यादा कीमत चुकानी होगी बल्कि निर्माता गण खासकर सूक्ष्म लघु और मध्यम इकाइयों के लिए इस क्षेत्र में बने रहना और कठिन हो जायेगा। इसीलिये वे भारी निराशा में हैं और सरकार से गुहार लगा रहे हैं। ।
मालूम हो कि एक हजार रुपये तक की कीमत के परिधानों पर अब तक 5 प्रतिशत की दर से टैक्स लगता था जिसे बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया गया है। इसमें खास बात यह है कि कम दाम वाले अधिकतर उत्पाद सूक्ष्म लघु और मध्यम इकाइयों में ही बनते हैं और यह सेक्टर टैक्स में किये गये बढ़ोतरी से ज्यादा प्रभावित होगा क्योंकि इसमें एक काफी बड़ा श्रम बल लगा हुआ है।
टैक्स दर की बढ़ोतरी से सरकार के राजस्व में अतिरिक्त 8 हजार करोड़ रुपये सालाना की आय होगी जबकि हर महीने सरकार को एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा राजस्व आ रहा है। प्रभावित कपड़ा व्यापारियों का कहना है उद्योग पहले से है कच्चे माल की कीमतों मे वृद्धि की मार झेल रहा ह। टैक्स की बढ़ोतरी न सिर्फ मुद्रास्फीर्ति बढ़ायेगी बल्कि कपड़ा एम एस एम ई क्षेत्र मे काम कर रहे लगभग 10लाख श्रमिकों के समक्ष बेरोजगारी की नयी समस्या उत्पन्न होगी।
टेक्सटाइल के एक छोटे भाग मे मौजूद उल्टा कर ढ़़ांचा के हल में सामान्यीकरण का जो फार्मूला अपनाया गया उससे हल के बजाय समस्याएं उत्पन्न हो गयीं। मंहगाई और बेरोजगारी की आशंका के मद्देनजर सरकार को निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।

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