April 19, 2026

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कोई शांति नहीं खरीदा सकता, योग-ध्यान से ही यह संभव-ईश्वरानंद गिरि

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योग दिवस के अवसर पर “योग-ध्यान के माध्यम से शान्ति” का अनुभव
रांची। “आप शान्ति नहीं खरीद सकते; आपके लिए यह जानना आवश्यक है कि ध्यान के अपने दैनिक अभ्यास की निश्चलता में अपने अंर्त में उसका निर्माण कैसे किया जा सकता है।” अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया (वाईएसएस) के संस्थापक  परमहंस योगानन्द, के इन शब्दों के साथ वरिष्ठ वाईएसएस संन्यासी स्वामी ईश्वरानन्द गिरि ने इस आध्यात्मिक संस्था के राँची आश्रम से लाइवस्ट्रीम किए गए ऑनलाइन कार्यक्रम में 2,500 से अधिक श्रोताओं, जिनमें अनेक नवागंतुक भी सम्मिलित थे, का ध्यान-योग के सिद्धांतों से परिचय कराया।
आश्रम का शान्त वातावरण निर्देशित ध्यान-सत्र के इस कार्यक्रम के लिए आदर्श था। इस कार्यक्रम के माध्यम से श्रोता उस शान्ति को अनुभव कर सके जिसे योग के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। सम्पूर्ण विश्व में भारत के प्राचीन क्रियायोग विज्ञान के प्रसार, जिसका वर्तमान प्रतीक यह अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस है, में श्री श्री परमहंस योगानन्दजी के योगदानों की प्रशंसा करते हुए स्वामीजी ने कहा, “उन्होंने विश्व को एक व्यावहारिक पद्धति प्रदान की जिसके द्वारा जीवन के सभी क्षेत्रों के आध्यात्मिक साधक शान्ति का अनुभव कर सकते हैं और आत्मसाक्षात्कार के अन्तिम लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।”
स्वामीजी ने क्रियायोग की शिक्षाओं की अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए सत्यान्वेषियों को आमन्त्रित किया और घर में रहकर ही अध्ययन करने के लिए वाईएसएस मार्ग में उपलब्ध पाठमाला के बारे में अधिक जानकारी के लिए वाईएसएस वेबसाइट देखने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया। योगानन्दजी की श्रीमद्भगवद्गीता की व्याख्या, ईश्वर-अर्जुन संवाद, से उद्धृत करते हुए, स्वामीजी ने योग से प्राप्त होने वाले लाभों के बारे में बताया रू “योग सिखाता है कि जहाँ ईश्वर हैं, वहाँ कोई भय नहीं है, कोई चिन्ता नहीं है। सफल योगी टूटते हुए संसारों के टकराव के मध्य अविचलित खड़ा रह सकता है। एकमात्र सच्ची स्वतंत्रता ईश्वर में ही निहित है। इसलिए, ध्यान में रात-दिन, और पूरे दिन अपने सभी कार्यों एवं कर्तव्यों को करते हुए, ईश्वर से सम्पर्क स्थापित करने का गहन प्रयास करें।”
इस अवसर पर स्वामी ईश्वरानन्दजी ने योगानन्दजी के व्याख्यानों एवं निबन्धों के एक संकलन का हिंदी अनुवाद, “दिव्य प्रेमलीला” का उद्घाटन भी किया। इस पुस्तक में व्यापक ज्ञान, प्रोत्साहन, और मानवता के प्रति प्रेम का अनूठा संगम देखने को मिलता है, जिनके कारण गुरुदेव और वाईएसएस के संस्थापक की गिनती हमारे युग के आध्यात्मिक जीवन के सर्वाधिक विश्वसनीय मार्गदर्शकों में की जाती है।  

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