कहा-आदिवासी समाज की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को अक्षुण्ण और सुदृढ़ करना प्राथमिकता
गलवान घाटी में शहीद वीर सपूत गणेश हांसदा की माता को सौंपा नियुक्ति पत्र
जमशेदपुर। आदिवासी का अर्थ ही है- आदि समय से वास करना । हमें आदिवासी समाज की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को ना सिर्फ अक्षुण्ण रखना है बल्कि इसे और भी सुदृढ़ करना है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आज घाटशिला में माझी पारगाना माहाल, धाड़ दिशोम के दो दिवसीय महासम्मेलन के समापन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए ये बातें कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस महासम्मेलन में संथाली आदिवासी समाज की आर्थिक- सामाजिक -राजनीतिक और पारंपरिक व्यवस्था, कला- संस्कृति, शिक्षा और स्वास्थ्य समेत कई महत्वपूर्ण विषयो पर आप सभी ने जो विचार विमर्श और गहन मंथन किया है, वह संताल आदिवासी समाज की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की दिशा में बेहतरीन पहल है । इस कड़ी में सरकार की ओर से जो भी सहयोग की जरूरत होगी, उसे पूरा किया जाएगा।।
आदिवासियों का संघर्ष ही उनकी पहचान है
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासियों का संघर्ष ही उनकी पहचान है। लंबे समय से ही ये अन्याय का विरोध करते रहे हैं । देश की आजादी की लड़ाई में हम अपने आदिवासी वीर सपूतों के योगदान को कभी भुला नहीं सकते हैं । इन्होंने देश की खातिर सहर्ष ही अपनी कुर्बानी दे दी थी। अपने इन महापुरुषों और शहीदों के सपनों का झारखंड बनाना है । इसके लिए सरकार कृत संकल्प है । आज हम सभी को इन से प्रेरणा लेकर उनके बताए मार्गाे पर चलना चाहिए।

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