April 19, 2026

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कांग्रेस के हाथ में आया मांडर, शिल्पी नेहा तिर्की ने बीजेपी की गंगोत्री कुजूर को किया पराजित

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अलग झारखंड राज्य गठन के बाद पहली बार मांडर से कांग्रेस को मिली जीत
रांची। झारखंड में मांडर विधानसभा उपचुनाव का परिणाम कांग्रेस के खाते में गया है। कांग्रेस की शिल्पी नेहा तिर्की ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भारतीय जनता पार्टी की गंगोत्री कुजूर को 23,517 वोटों के अंतर से पराजित किया। शिल्पी नेहा तिर्की को 95062 मत प्राप्त हुए, जबकि बीजेपी की गंगोत्री कुजूर को 71545 वोट मिले। मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में जुटे देवकुमार धान को महज 22395 वोट से ही संतोष करना पड़ा।

पिता बंधु तिर्की की हार का बदला गंगोत्री कुजूर से लिया

कांग्रेस की शिल्पी नेहा तिर्की ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भारतीय जनता पार्टी की गंगोत्री कुजूर से लिया है। वर्ष 2005 और 2009 में लगातार दो बार मांडर से जीतने वाले शिल्पी नेहा तिर्की के पिता बंधु तिर्की को वर्ष 2014 के चुनाव में गंगोत्री कुजूर ने ही पराजित कर जीत कर हैट्रिक लगाने से रोक दिया था। लेकिन वर्ष 2019 में बीजेपी ने गंगोत्री कुजूर को उम्मीदवार ही नहीं बनाया, इस कारण बंधु तिर्की ने उस वक्त बीजेपी के देवकुमार धान को पराजित कर चुनाव में जीत हासिल की थी। लेकिन इस बार बंधु तिर्की चुनाव लड़ने से अयोग्य हो गये और उनकी बेटी ने गंगोत्री कुजूर से अपने पिता की हार का बदला लिया।

ओवैसी की अपील रही बेअसर
मांडर विधानसभा उपचुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी देवकुमार धान के समर्थन में चुनाव प्रचार के लिए एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी पहुंचे थे। उनकी सभा में बड़ी भीड़ भी जुटी थी और दावा किया जा रहा था कि मांडर उपचुनाव प्रचार में जितनी भी सभाएं हुई, उसमें सबसे अधिक भीड़ ओवैसी ही चुनावी सभा में ही जुटी, लेकिन यह भीड़ देवकुमार धान के पक्ष में वोट में तब्दील नहीं हो सकी। देवकुमार धान को महज वोट से ही संतोष करना पड़ा।

बंधु तिर्की का दबदबा बरकरार
मांडर विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी शिल्पी नेहा तिर्की की जीत के साथ ही उनके पिता और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की का क्षेत्र में दबदबा सिद्ध हो गया है। बंधु तिर्की मांडर विधानसभा क्षेत्र से छह बार अलग-अलग चुनाव चिह्न से चुनाव लड़ चुके है और तीन बार जीत भी हासिल की। इस उनकी बेटी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने में सफल रही। जबकि इससे पहले बंधु तिर्की कांग्रेस समेत अन्य दलों के उम्मीदवार को ही पराजित कर चुनाव जीतते रहे है। उनके कांग्रेस में शामिल होने के बाद अलग झारखंड राज्य के गठन के बाद पहली बार मांडर से कांग्रेस को जीत मिली है।

नोटा का 2633 ने किया प्रयोग, दस प्रत्याशियों से अधिक वोट
उपचुनाव परिणाम की एक खास बात यह भी रही कि उपचुनाव में 14 प्रत्याशियों में से 10 प्रत्याशियों से अधिक नोटा को मिला। नोटा का 2633 मतदाताओं ने प्रयोग किया।

सदस्यता समाप्त होने के कारण हुआ था उपचुनाव
मांडर विधानसभा उपचुनाव विधायक बंधु तिर्की की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने के कारण कराया गया। बंधु तिर्की को आय से अधिक संपत्ति मामले मे सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा 28 मार्च को दोषी करार देते हुए 3 साल की सजा सुनायी गयी थी, जिसके कारण संवैधानिक बाध्यता के कारण उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गयी थी। जिसके बाद 23 जून को उपचुनाव के लिए 61.25 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।


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