रांची। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम ने हजारीबाग जिले में बड़कागांव के चर्चित ढेंगा और चिरुडीह गोलीकांड के पीड़ितों की याचिका पर सुनवाई की।
सुनवाई के बाद आयोग के अध्यक्ष जस्टिस अरुण मिश्रा ने राज्य सरकार को पीड़ितों को ढाई-ढाई लाख रुपया मुआवजा देने का निर्देश दिया। सभी को मुआवजा छह माह के अंदर देने का आदेश दिया गया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में मंटू सोनी के किए गए शिकायत का संज्ञान लेते हुए आयोग ने सुनवाई की है।मानवाधिकार आयोग ने रांची के धुर्वा स्थित न्यायिक अकादमी में हुई सुनवाई के दौरान मंटू सोनी से पूरी घटनाक्रम को सुना। उनकी तरफ से अधिवक्ता अभिषेक कृष्ण गुप्ता ने कानूनी पक्ष मानवाधिकार आयोग की टीम को विस्तार से बताया। जबकि राज्य सरकार की तरफ से गृह सचिव राजीव अरुण एक्का, अखिलेश झा, सीआईडी के एसपी कार्तिक एस मौजूद थे।
सुनवाई के दौरान ढेंगा और चिरुडीह गोलीकांड के पीड़ित मंटू सोनी,जुबैदा खातून,संतोष राम,संजय राम, श्रीचंद राम, सन्नी देवल कुमार समेत अन्य के साथ अधिवक्ता अनिरुद्ध कुमार,मुखिया इलियास अंसारी मौजूद रहे। राज्य सरकार की ओर से मामले की जांच सीआईडी से कराने की बात कही गयी।
गौरतलब है कि 14 अगस्त, 2015 को हजारीबाग के ढेंगा में किसान अधिकार महारैली के दौरान ग्रामीण और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। इस दौरान पुलिस की ओर से आत्मरक्षा की बात कहते हुए फायरिंग की गयी थी। इसमें छह लोगों को गोली लगी थी। घायलों का बड़कागांव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक इलाज के बाद हजारीबाग सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। घायल लोगों ने अपने दिये गये बयान में बताया था कि पुलिस ने जानबूझकर फायरिंग की थी।

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